पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 35 पैसे टूटकर 92.36 के रिकॉर्ड इंट्रा-डे निचले स्तर पर पहुंच गया।
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.25 प्रति डॉलर पर खुला, लेकिन दिनभर के कारोबार के दौरान इसमें लगातार कमजोरी बनी रही और यह गिरकर 92.36 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। यह अब तक का सबसे निचला इंट्रा-डे स्तर माना जा रहा है।
डॉलर की मजबूती और तेल की कीमतों से बढ़ा दबाव
मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये की स्थिति को कमजोर किया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे आयात पर निर्भर भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव बनता है।
शेयर बाजार में कमजोरी और FII की बिकवाली
घरेलू शेयर बाजार में भी नकारात्मक रुख देखने को मिला। सेंसेक्स 445.26 अंक गिरकर 76,418.45 पर आ गया, जबकि निफ्टी 121.70 अंक की गिरावट के साथ 23,745.15 पर पहुंच गया।
बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को शुद्ध रूप से 6,267.31 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार और रुपये दोनों पर दबाव बढ़ गया।
पिछले रिकॉर्ड को भी पार किया
इससे पहले 9 मार्च को रुपया डॉलर के मुकाबले 92.35 के स्तर तक गिरा था, जो उस समय का सबसे निचला इंट्रा-डे स्तर था। वहीं बुधवार को रुपया 16 पैसे की गिरावट के साथ 92.01 पर बंद हुआ था।
वैश्विक संकेत भी नकारात्मक
डॉलर सूचकांक, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाता है, 0.18 प्रतिशत बढ़कर 99.40 पर पहुंच गया। इसके साथ ही वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.72 प्रतिशत उछलकर 98.16 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले समय में रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है।
