Supreme Court of India ने OBC क्रीमी लेयर से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी उम्मीदवार को क्रीमी लेयर में शामिल करने के लिए केवल माता-पिता की आय को आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत के अनुसार इस प्रक्रिया में अभिभावकों का पद, सामाजिक स्थिति और सेवा वर्ग भी महत्वपूर्ण मानदंड हैं।

यह फैसला उन उम्मीदवारों के लिए राहत लेकर आया है जिन्होंने UPSC Civil Services Examination पास करने के बावजूद नियुक्ति नहीं पाई थी। सरकार ने उनके माता-पिता की सैलरी के आधार पर उन्हें क्रीमी लेयर में डाल दिया था, जिससे वे आरक्षण के लाभ से वंचित हो गए थे।

दो जजों की पीठ ने सरकार की अपील खारिज की

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति P. S. Narasimha और न्यायमूर्ति R. Mahadevan की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की उन अपीलों को खारिज कर दिया, जो विभिन्न हाई कोर्ट के फैसलों के खिलाफ दायर की गई थीं।

पीठ ने कहा कि अधिकारियों द्वारा केवल आय के आधार पर क्रीमी लेयर तय करना सही मानक नहीं है। क्रीमी लेयर निर्धारण के लिए माता-पिता का पद और उनकी प्रशासनिक स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

PSU कर्मचारियों के बच्चों से जुड़ा था विवाद

यह मामला मुख्य रूप से उन उम्मीदवारों से संबंधित था जिनके माता-पिता सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बैंकों या अन्य संस्थानों में कार्यरत थे। सरकार ने 2004 के एक स्पष्टीकरण पत्र का हवाला देते हुए उनकी सैलरी को आय में जोड़ दिया, जिसके कारण उन्हें क्रीमी लेयर में शामिल कर दिया गया।

हालांकि अदालत ने 1993 के सरकारी आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आदेश Indra Sawhney v. Union of India के बाद लागू किया गया था और इसमें स्पष्ट किया गया है कि क्रीमी लेयर निर्धारण में माता-पिता का पद प्रमुख आधार है।

समानता के अधिकार पर जोर

अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी कर्मचारियों और PSU कर्मचारियों के बीच अलग-अलग मानदंड लागू करना उचित नहीं है। यदि सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को पद के आधार पर छूट मिलती है, तो PSU कर्मचारियों के बच्चों को केवल आय के आधार पर आरक्षण से बाहर करना समानता के अधिकार के विरुद्ध है।

छह महीने में पुनर्विचार का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह छह महीने के भीतर प्रभावित उम्मीदवारों के मामलों की दोबारा समीक्षा करे। अदालत ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर इन योग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के लिए अतिरिक्त पद सृजित किए जा सकते हैं।

यह फैसला OBC आरक्षण नीति और क्रीमी लेयर निर्धारण से जुड़े नियमों को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण न्यायिक कदम माना जा रहा है।