International Olympic Committee (IOC) ने आगामी 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक से पहले महिलाओं के खेलों को लेकर एक अहम नीति बदलाव किया है। इस नई गाइडलाइन के तहत अब ओलंपिक की महिला स्पर्धाओं में केवल बायोलॉजिकल महिलाएं ही हिस्सा लेने के लिए पात्र होंगी, जबकि ट्रांसजेंडर एथलीट्स को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।

यह निर्णय IOC की कार्यकारी बोर्ड बैठक के बाद सामने आया, जिसमें खेलों में निष्पक्षता, संतुलन और प्रतिस्पर्धा की विश्वसनीयता को प्राथमिकता दी गई।

क्या है नई पात्रता नीति?

IOC के अनुसार, यह नियम सभी महिला वर्ग की व्यक्तिगत और टीम प्रतियोगिताओं पर लागू होगा। यानी अब किसी भी IOC-मान्यता प्राप्त इवेंट में ट्रांसजेंडर खिलाड़ी महिलाओं के कैटेगरी में भाग नहीं ले पाएंगे।

हालांकि, समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह नियम केवल एलीट और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक सीमित रहेगा और इसका प्रभाव स्थानीय या मनोरंजक खेल आयोजनों पर नहीं पड़ेगा।

कब से लागू होगा नियम?

नई पात्रता नीति जुलाई 2028 में होने वाले 2028 Summer Olympics से लागू की जाएगी। IOC ने इसके लिए एक विस्तृत 10 पन्नों का आधिकारिक दस्तावेज भी जारी किया है, जिसमें नियमों और पात्रता की शर्तों को विस्तार से बताया गया है।

एथलीट्स पर असर

इस फैसले के बाद कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के भविष्य पर असर पड़ सकता है। खासकर दो बार की ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट धाविका Caster Semenya जैसे नाम चर्चा में हैं, जिनकी पात्रता को लेकर पहले भी विवाद रहा है।

निष्पक्ष खेल बनाम समावेशन की बहस

IOC का यह कदम जहां खेलों में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है, वहीं यह निर्णय समावेशन और समान अवसर जैसे मुद्दों पर नई बहस को जन्म दे सकता है। आने वाले समय में इस नीति पर वैश्विक स्तर पर चर्चा और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।