भारतीय बैडमिंटन को एक नया सितारा मिल चुका है। युवा शटलर आयुष शेट्टी ने एशियन चैंपियनशिप में अपने शानदार प्रदर्शन से न सिर्फ देश को गौरवान्वित किया, बल्कि अपने इरादे भी साफ कर दिए—उनका लक्ष्य अब दुनिया का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनना है।

कठिन मुकाबलों में दिखाया दम

पूरे टूर्नामेंट के दौरान आयुष ने जिस आत्मविश्वास और संयम के साथ खेल दिखाया, उसने उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग पहचान दिलाई। हर मैच उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने दबाव में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की।

फाइनल में हार, लेकिन सीख बड़ी

फाइनल में उनका सामना मौजूदा विश्व चैंपियन Shi Yuqi से हुआ, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, आयुष ने इस हार को सकारात्मक रूप में लिया और प्रतिद्वंद्वी के बेहतर खेल को स्वीकार किया।

उन्होंने कहा कि भले ही वह खिताब नहीं जीत पाए, लेकिन यह अनुभव उनके करियर के लिए बेहद अहम है।

रजत पदक से रचा नया इतिहास

सिल्वर मेडल जीतने के साथ आयुष 2018 के बाद एशियन चैंपियनशिप में पोडियम तक पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरुष सिंगल्स खिलाड़ी बन गए। इससे पहले H. S. Prannoy ने यह उपलब्धि हासिल की थी।

यह उपलब्धि बताती है कि आयुष अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं।

दिग्गज खिलाड़ी को हराकर बढ़ाया कद

सेमीफाइनल में आयुष ने थाईलैंड के स्टार खिलाड़ी Kunlavut Vitidsarn को हराकर फाइनल में जगह बनाई। यह जीत उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है और इसने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी।

“अब लक्ष्य सिर्फ नंबर-1 बनना है”

आयुष शेट्टी का मानना है कि यह टूर्नामेंट उनके करियर का टर्निंग पॉइंट है।
उन्होंने कहा,
“मुझे अब विश्वास हो गया है कि मैं दुनिया का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बन सकता हूं। लेकिन इसके लिए मुझे लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा।”

थॉमस कप पर नजर

अब आयुष का पूरा ध्यान आगामी थॉमस कप पर है, जहां वह टीम इंडिया के साथ एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करना चाहते हैं।

उनका फोकस साफ है—निरंतरता, मेहनत और बड़े मंच पर लगातार जीत।