मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Strait of Hormuz पर एक बार फिर कड़ा नियंत्रण लागू कर दिया है। यह कदम अमेरिका की कथित समुद्री घेराबंदी और दबाव की नीति के जवाब में उठाया गया है। ईरान ने अमेरिका पर समझौतों का उल्लंघन करने और समुद्री गतिविधियों में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए अपने रुख को और सख्त कर लिया है।
ईरानी सरकारी प्रसारक Islamic Republic of Iran Broadcasting के अनुसार, तेहरान ने पहले बातचीत के बाद इस जलमार्ग को सीमित रूप से खोलने की अनुमति दी थी, ताकि तेल टैंकर और व्यापारिक जहाज नियंत्रित तरीके से गुजर सकें। लेकिन अब हालात बदल गए हैं और पूरा क्षेत्र ईरान के सशस्त्र बलों की निगरानी में आ गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक ईरानी जहाजों की आवाजाही पर लगे प्रतिबंध पूरी तरह खत्म नहीं होते, तब तक यह सख्ती जारी रहेगी।
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump का हालिया बयान अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा था कि ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक कोई पूर्ण शांति समझौता नहीं हो जाता। उनके इस बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया।
ईरान की संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को अब ईरान के तय नियमों और मार्गों का सख्ती से पालन करना होगा। बिना अनुमति किसी भी जहाज को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। ऐसे में इस पर बढ़ता सैन्य नियंत्रण अंतरराष्ट्रीय बाजार, तेल कीमतों और वैश्विक व्यापार पर व्यापक असर डाल सकता है। यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
