दिल्ली में 25 से ज्यादा विधायक और करीब 6 मंत्री डेरा डाले हुए हैंl मंत्रियों और विधायकों की दिल्ली ये उपस्थिति ये बताने के लिए काफी है कि कांग्रेस का एक गुट ये नहीं चाहते कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन हो।

विधायकों ने बाबा को ये कहते हुए साइडलाइन कर दिया है कि उनके नेतृत्व में वे राजनीति की हत्या नहीं होने देंगेl विधायकों का कहना है कि उन्हें सिंहदेव के नेतृत्व में अपना राजनीतिक भविष्य नहीं दिख रहा है गुरुवार को सभी विधायक हाईकमान से मिलकर अपनी बात रख चुके हैंl इन विधायकों में अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के विधायक ज्यादा हैंl सीएम भूपेश के समर्थन की मंत्री शिवकुमार डहरिया, अमरजीत भगत, उमेश पटेल और अनिला भेड़िया खुलकर सामने आ गए हैंl
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में मचे इस सियासी भूचाल के रचयिता माने जाने वाले दिग्विजय सिंह को इसका समाधान निकालने का जिम्मा सौंपा जा रहा हैl

जोखिम भरा होगा फैसला

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े विधायकों का मानना है कि चुनाव में दो साल बाकी रह गए हैं ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन करना किसी जोखिम से कम नहीं हैl विधायक ये चाह रहे हैं कि हाईकमान पर्यवेक्षक भेजकर वास्तविक स्थिति की जानकारी लेनी चाहिएl विधायकों का ये भी मानना है कि महाराजा साहब के नेतृत्व में आगामी चुनाव जीतना असंभव है।

बढ़ रहे सीएम पिछड़ते दिख रहे सिंहदेव

भूपेश बघेल के पास वर्तमान में पर्याप्त समर्थन है और कहीं न कहीं सिंहदेव पिछड़ते हुए दिख रहे हैं। सीएम बघेल किसान और पिछड़ा वर्ग का चेहरा बन चुके हैं। वो छत्तीसगढिया चेहरा हैं इसके कारण उनका अपने साथी मंत्रियों के साथ सम्मानपू्र्वक व्यवहार है।
सीएम भूपेश की नीति प्रदेश और पार्टी के लिए गेम चेंजर साबित हुई है। सूत्रों की मानें तो बीजेपी भी सीएम भूपेश की बढ़ती लोकप्रियता से डर रही है।

पार्टी के भविष्य की चिंता

सरगुजा महाराजा टीएस सिंहदेव, को विधायकों ने छोड़ दिया है। क्योंकि उन्हें विश्वास है कि उनके नेतृत्व में, कांग्रेस राजनीतिक रूप से अप्रासंगिक हो जाएगी। वे अपने स्वयं के राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ छत्तीसगढ़ राज्य में पार्टी के भविष्य से भी डरे हुए हैं।