आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक गंभीर खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी Inter-Services Intelligence (ISI) भारत में बड़े आतंकी हमले की साजिश रच रही है और इसके लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाई जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि ISI का मकसद चुनावी माहौल को अस्थिर करना और सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित करना है। इसके लिए प्रोपेगेंडा, जासूसी और ग्राउंड लेवल नेटवर्क को सक्रिय किया जा रहा है, ताकि असली साजिश पर ध्यान न जा सके।
CCTV के जरिए जासूसी का जाल
खुफिया रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि देश के कई हिस्सों में संदिग्ध तरीके से सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। ये कैमरे संवेदनशील स्थानों की निगरानी कर जानकारी इकट्ठा करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। आशंका है कि इनका डेटा सीधे विदेश में बैठे हैंडलर्स तक पहुंचाया जा रहा है।
हाल ही में गाजियाबाद में एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिसमें सोलर पावर्ड कैमरों के जरिए रेलवे स्टेशन और अन्य अहम जगहों की लाइव फीड बाहर भेजी जा रही थी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने देशभर में कैमरों की जांच तेज कर दी है।
छोटे शहर भी निशाने पर
एजेंसियों का मानना है कि इस बार साजिश केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों और गांवों को भी निशाना बनाया जा सकता है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था को भ्रमित किया जा सके और अचानक हमला संभव हो सके।
सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश
इंटरसेप्ट्स के जरिए संकेत मिले हैं कि ISI प्रोपेगेंडा चैनलों के माध्यम से देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स के जरिए भड़काऊ सामग्री फैलाकर माहौल बिगाड़ने की रणनीति अपनाई जा रही है।
नेताओं की मूवमेंट पर नजर
सूत्रों के मुताबिक चुनाव प्रचार के दौरान बड़े नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ढाबों, दुकानों और सड़क किनारे स्थानों पर कैमरे लगाए जा सकते हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था और यात्रा मार्ग की जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा सकता है।
एजेंसियां अलर्ट मोड में
हालांकि, कई राज्यों में पहले भी ऐसे मॉड्यूल का भंडाफोड़ हो चुका है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह केवल ध्यान भटकाने का हिस्सा भी हो सकता है। ऐसे में देशभर में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और हर संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
