गोडबोले दंपति ने बस्तर संभाग के दूरस्थ इलाकों में सेवा दी। इसके अलावा उन्होंने नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में कार्य किया। क्षेत्र लंबे समय तक माओवादी प्रभाव से प्रभावित रहा। इसलिए स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना चुनौतीपूर्ण माना गया। फिर भी सेवा गतिविधियां लगातार संचालित की गईं।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में गोडबोले दंपति पद्मश्री सम्मान सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दंपति को अलंकृत किया। गोडबोले दंपति पद्मश्री सम्मान अब राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना है। वहीं दूसरी ओर जनजातीय सेवा कार्यों को भी नई पहचान मिली है।
गोडबोले दंपति पद्मश्री सम्मान में मुख्यमंत्री ने सेवा भावना को सराहा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सम्मान पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह समर्पण और संवेदनशीलता की पहचान है। दरअसल दंपति ने दशकों तक नि:स्वार्थ चिकित्सा सेवा दी। इसके बाद जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ी। कुल मिलाकर ग्रामीण समाज को व्यापक लाभ मिला।
स्वास्थ्य और कुपोषण पर केंद्रित प्रयास
दंपति ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया। साथ ही बच्चों में कुपोषण कम करने के प्रयास किए। महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता दी गई। हालांकि संसाधन सीमित थे। फिर भी सेवा कार्य प्रभावित नहीं हुआ। नतीजतन कई गांवों में चिकित्सा पहुंच बेहतर हुई।
ओपी चौधरी ने बताया प्रेरणादायी उपलब्धि
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दंपति को बधाई दी। वहीं उन्होंने इसे करुणा और दायित्वबोध का सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि इस कार्य से हजारों परिवारों को लाभ मिला। इसी बीच गोडबोले दंपति पद्मश्री सम्मान को व्यापक सराहना मिल रही है। कुल मिलाकर यह उपलब्धि प्रेरणादायी मानी जा रही है।
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