धमतरी जिले के सरकारी स्कूलों में लागू डिजिटल अटेंडेंस व्यवस्था शिक्षकों के लिए नई चुनौती बन गई है। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के दौरान कई शिक्षकों को तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने का उद्देश्य सराहनीय है, लेकिन तकनीकी कमियों के कारण इसका प्रभाव उल्टा पड़ रहा है।
स्कूल में मौजूद, फिर भी अनुपस्थित का खतरा
कई शिक्षकों ने शिकायत की है कि डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम विद्यालय में मौजूद होने के बावजूद उनकी लोकेशन गलत दर्ज कर रहा है। GPS आधारित चेक-इन में स्कूल से दूर की स्थिति दिखाई जा रही है, जिससे उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही है। इससे शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है कि कहीं तकनीकी त्रुटियों के कारण उन्हें अनुपस्थित न माना जाए।
लॉगिन और रिकॉर्ड संबंधी समस्याएं
डिजिटल अटेंडेंस प्रक्रिया में मोबाइल नंबर मिसमैच, लॉगिन एरर और सर्वर स्लो होने जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। कई शिक्षकों को कई बार प्रयास करने के बाद भी सफलता नहीं मिल रही है। इससे उनका समय और ऊर्जा दोनों प्रभावित हो रहे हैं, जबकि उन्हें विद्यार्थियों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
संगठन ने प्रशासन से की अपील
शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि डिजिटल अटेंडेंस प्रणाली में सुधार होने तक वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए। उनका कहना है कि तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज न होने पर शिक्षकों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। साथ ही वेतन या प्रशासनिक कार्रवाई से भी बचाया जाना चाहिए।
बायोमेट्रिक व्यवस्था हो लागू
संगठन ने सुझाव दिया है कि डिजिटल अटेंडेंस के साथ प्रत्येक विद्यालय में बायोमेट्रिक मशीनें भी उपलब्ध कराई जाएं। इससे उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया सरल और विश्वसनीय बनेगी। शिक्षकों का मानना है कि तकनीकी समाधान के बिना केवल ऐप आधारित व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है।
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