राजधानी रायपुर में शुरू होने जा रही शंकर नगर परियोजना को राज्य की सबसे महत्वपूर्ण शहरी योजनाओं में शामिल किया जा रहा है। बी.टी.आई. ग्राउंड के सामने स्थित यह क्षेत्र लंबे समय से विकास की संभावनाओं का केंद्र रहा है। अब रिडेवलपमेंट मॉडल के जरिए यहां आधुनिक अधोसंरचना, सुव्यवस्थित निर्माण और नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, जिससे क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।
पांच शहरों में लागू होगी योजना
राज्य सरकार की शंकर नगर परियोजना के साथ महासमुंद, राजनांदगांव, कोरबा और जगदलपुर में भी रिडेवलपमेंट योजनाएं लागू की जाएंगी। इन सभी परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का लक्ष्य शहरों में उपलब्ध शासकीय भूमि और परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग करते हुए आधुनिक विकास को बढ़ावा देना है।
बिना अतिरिक्त खर्च के होगा विकास
इस शंकर नगर परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके लिए अतिरिक्त सरकारी वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए शासकीय भूमि के मूल्य का उपयोग किया जाएगा। इससे सार्वजनिक संपत्तियों का संरक्षण और उनका उत्पादक उपयोग दोनों सुनिश्चित होंगे। सरकार इसे टिकाऊ और आत्मनिर्भर विकास मॉडल के रूप में देख रही है।
निजी क्षेत्र को मिलेगा अवसर
सरकार की शंकर नगर परियोजना में निजी डेवलपर्स की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्राइम लोकेशन वाली जमीनों पर विकास कार्यों के अवसर मिलने से निवेशकों की रुचि बढ़ेगी। पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया और स्पष्ट नीति परियोजनाओं को सफल बनाने में सहायक साबित होगी। इससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
नई परियोजनाओं की तैयारी शुरू
आवास एवं पर्यावरण विभाग ने संकेत दिए हैं कि शंकर नगर परियोजना जैसे मॉडल को राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को आगामी आठ नई परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे भविष्य में छत्तीसगढ़ के शहरों में बड़े पैमाने पर आधुनिक विकास कार्य देखने को मिल सकते हैं।
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