रायपुर से प्रारंभ हुई सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा में प्रदेशभर के 1000 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इनमें पद्मश्री सम्मानित हस्तियां, साहित्यकार, कलाकार और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित लोग शामिल हैं। विशेष ट्रेन के माध्यम से शुरू हुई यह यात्रा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। श्रद्धालुओं में भगवान सोमनाथ के दर्शन को लेकर विशेष उत्साह देखा गया।
छत्तीसगढ़ की पहचान लेकर पहुंचे श्रद्धालु
इस सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा के दौरान श्रद्धालु अपने साथ प्रदेश के प्रमुख शिवालयों की पवित्र माटी और नदियों का जल लेकर जा रहे हैं। इन कलशों को भगवान सोमनाथ को समर्पित किया जाएगा। यह आयोजन केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का प्रयास भी है।
प्रधानमंत्री की पहल से हो रहा आयोजन
मुख्यमंत्री ने बताया कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 11 जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2027 तक राष्ट्रीय स्मरणोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य देशवासियों को सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय गौरव से जोड़ना है। इस यात्रा के माध्यम से लोगों में इतिहास और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
सरदार पटेल के योगदान का स्मरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा हमें लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के उस संकल्प की याद दिलाती है, जिसके कारण स्वतंत्र भारत में सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण संभव हुआ। उन्होंने बताया कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पुनर्निर्मित मंदिर का लोकार्पण किया था, जो भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक बना।
सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति, इतिहास और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगी। यह आयोजन राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक चेतना और धार्मिक आस्था के संदेश को और मजबूत करेगा।
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