कबीरधाम जिले का भोरमदेव मॉडल देशभर में सहकारिता की सफलता का उदाहरण बनकर उभरा है। लगातार दूसरे वर्ष जून माह में किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान कर कारखाने ने राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बनाई है। गन्ना किसानों के लिए समय पर भुगतान सबसे बड़ी आवश्यकता होती है और इसी क्षेत्र में भोरमदेव ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इससे किसानों में भरोसा बढ़ा है और सहकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता मजबूत हुई है।
करोड़ों रुपये सीधे किसानों के खातों में पहुंचे
भोरमदेव मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता पारदर्शी भुगतान व्यवस्था है। हाल ही में 29.83 करोड़ रुपये किसानों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर किए गए। इसके साथ ही चालू पेराई सत्र में कुल 107.10 करोड़ रुपये का भुगतान पूरा हो गया। इस कदम ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है और उन्हें समय पर खेती के लिए संसाधन उपलब्ध कराने में मदद की है।
किसान हितैषी योजनाओं ने दिलाई अलग पहचान
भोरमदेव मॉडल केवल भुगतान तक सीमित नहीं है। यहां किसानों को उन्नत गन्ना बीज, मिट्टी परीक्षण, प्रेसमड वितरण और तकनीकी प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इन पहलों से उत्पादन क्षमता बढ़ी है और किसानों की लागत में कमी आई है। यही कारण है कि यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है।
उत्पादन और रिकवरी में भी बेहतर प्रदर्शन
लगातार तीसरे वर्ष 12 प्रतिशत से अधिक शुगर रिकवरी हासिल करना भोरमदेव मॉडल की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। बेहतर प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कारखाने ने उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। इससे न केवल कारखाने की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है बल्कि किसानों को भी अधिक लाभ प्राप्त हुआ है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई ताकत
भोरमदेव मॉडल ने यह साबित किया है कि मजबूत सहकारिता व्यवस्था ग्रामीण विकास की आधारशिला बन सकती है। किसानों की सक्रिय भागीदारी और पारदर्शी कार्यप्रणाली ने पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। यही वजह है कि यह मॉडल देशभर में सफल सहकारी प्रबंधन के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
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