India Pakistan

India Pakistan Peace Appeal को लेकर दोनों देशों में नई बहस शुरू हो गई है। ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष बाद भारत और पाकिस्तान के 117 प्रमुख नागरिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संयुक्त पत्र लिखकर दोनों देशों के बीच संवाद, विश्वास बहाली और सामान्य रिश्तों को फिर से शुरू करने की अपील की है।

पत्र में कहा गया है कि लगातार तनाव और दुश्मनी दोनों देशों के करोड़ों लोगों, खासकर युवाओं के भविष्य और आर्थिक विकास को प्रभावित कर रही है।

महबूबा मुफ्ती ने क्या कहा?

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने India Pakistan Peace Appeal का समर्थन करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर सहित सभी लंबित मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिए ही संभव है। उन्होंने आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा पाकिस्तान से संवाद की आवश्यकता संबंधी बयानों का स्वागत किया और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रसिद्ध कथन—”दोस्त बदले जा सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं”—का उल्लेख किया।

उनका कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल होता है तो जम्मू-कश्मीर पूरे दक्षिण एशिया के लिए आर्थिक और सांस्कृतिक सेतु बन सकता है।

भाजपा ने क्यों जताई आपत्ति?

इस पहल पर भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि आतंकवाद पूरी तरह समाप्त हुए बिना पाकिस्तान से बातचीत उचित नहीं मानी जा सकती। उन्होंने कहा कि विदेश नीति और पाकिस्तान से जुड़े सभी फैसले केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

पत्र में किन मांगों को प्रमुखता दी गई?

India Pakistan Peace Appeal में दोनों देशों की सरकारों के सामने कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे गए हैं—

  • भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता दोबारा शुरू हो।
  • नई दिल्ली और इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों की नियुक्ति बहाल की जाए।
  • सामान्य वीजा सेवाएं फिर से शुरू हों।
  • अटारी-वाघा सीमा व्यापार और यात्रा के लिए खोली जाए।
  • दिल्ली-लाहौर बस सेवा, समझौता एक्सप्रेस और श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा पुनः शुरू की जाए।
  • करतारपुर साहिब कॉरिडोर और शारदा पीठ तक आसान पहुंच सुनिश्चित की जाए।
  • व्यापार, सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाए।

पत्र पर किन लोगों ने किए हस्ताक्षर?

इस संयुक्त अपील पर भारत के 61 और पाकिस्तान के 56 नागरिकों ने हस्ताक्षर किए हैं।

भारत की ओर से प्रमुख हस्ताक्षरकर्ताओं में महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला, मीरवाइज उमर फारूक, मनोज झा और हुमायूं कबीर शामिल हैं। वहीं पाकिस्तान की ओर से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी, इस्फान्यार भंडारा और परमाणु वैज्ञानिक परवेज हुदभोय जैसे प्रमुख नाम जुड़े हैं।

विश्वास बहाली के लिए क्या सुझाव दिए गए?

अपील में दोनों देशों से सैन्य तनाव कम करने, राजनयिक संबंध सामान्य बनाने और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसमें छात्रों, पत्रकारों, कलाकारों और व्यापारियों के लिए यात्रा आसान बनाने, मीडिया प्रतिबंधों में ढील देने और सीमा पार आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की गई है।

पत्र में कहा गया है कि स्थायी शांति केवल निरंतर संवाद और सहयोग से ही संभव है।

दक्षिण एशिया के भविष्य पर क्या संदेश दिया गया?

India Pakistan Peace Appeal में कहा गया है कि दक्षिण एशिया का भविष्य संघर्ष नहीं बल्कि सहयोग, शांति और साझा विकास पर आधारित होना चाहिए। दोनों देशों की संयुक्त आबादी दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत है, इसलिए क्षेत्रीय स्थिरता का लाभ करोड़ों लोगों तक पहुंच सकता है। अपील में इस पहल को किसी राजनीतिक विचारधारा का समर्थन नहीं, बल्कि आम नागरिकों की शांति और समृद्धि की मांग बताया गया है।

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