Asaram Bail Plea पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस समय सजा पर रोक लगाने या जमानत देने का कोई आधार नहीं है। अदालत ने कहा कि केवल बढ़ती उम्र या सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती। यदि भविष्य में गंभीर चिकित्सकीय आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तब जमानत पर विचार किया जा सकता है।
राज्य सरकार को जारी किया नोटिस
सुनवाई के दौरान अदालत ने राजस्थान सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही जेल प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा कि आरोपी को सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। Asaram Bail Plea पर अगली सुनवाई सरकार का पक्ष सामने आने के बाद होगी।
हाईकोर्ट के फैसले को क्यों दी गई चुनौती?
Asaram Bail Plea राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था। हालांकि कुछ आरोपों में राहत दी गई थी, लेकिन नाबालिग से दुष्कर्म से जुड़े मुख्य अपराध में दोषसिद्धि कायम रखी गई।
किन धाराओं में दोषसिद्धि बरकरार?
हाईकोर्ट ने आरोपी को यौन उत्पीड़न, नाबालिग से दुष्कर्म, आपराधिक धमकी, बंधक बनाने और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं में दोषी माना था। यही वजह है कि Asaram Bail Plea पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल किसी अंतरिम राहत से इनकार किया है।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि
वर्ष 2013 में दर्ज इस मामले में आरोप लगाया गया था कि आश्रम में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म किया गया। वर्ष 2018 में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके बाद हाईकोर्ट में अपील की गई, लेकिन राहत नहीं मिली। अब Asaram Bail Plea सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है।
आगे क्या होगा?
अब अदालत राजस्थान सरकार के जवाब का इंतजार करेगी। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। यदि स्वास्थ्य संबंधी कोई गंभीर और असाधारण परिस्थिति सामने आती है, तभी Asaram Bail Plea पर जमानत संबंधी अनुरोध पर विचार किए जाने की संभावना है।
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