तीन दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचीं जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया और दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के प्रतिनिधिमंडलों से परिचय कराया।
समारोह के दौरान जापानी प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सैनिकों के बैंड ने विशेष प्रस्तुति भी दी। भारत जापान संबंध को मजबूती देने के लिए दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक का दौर शुरू हुआ।
मुख्य अपडेट
- जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची तीन दिन के भारत दौरे पर हैं।
- राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
- भारत जापान संबंध को मजबूत बनाने पर विशेष चर्चा हुई।
- आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल रहे।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी दोनों देशों की सहमति बनी।
बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं की बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। भारत जापान संबंध को नई मजबूती देने के लिए आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और निवेश बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
दोनों देशों ने बदलते वैश्विक हालात में आपसी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक बनाने पर सहमति बनने की उम्मीद है।
रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार
भारत और जापान लंबे समय से विशेष रणनीतिक वैश्विक साझेदार हैं। इस बैठक में रक्षा, तकनीक, बुनियादी ढांचे और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जापान संबंध आने वाले वर्षों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता के लिए और अधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर दोनों देशों की साझा सोच
भारत आने से पहले सनाए ताकाइची ने कहा था कि भारत और जापान एशिया के प्रमुख लोकतांत्रिक देश हैं। दोनों देशों की जिम्मेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की है।
बैठक में ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ (FOIP) पहल पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर भी विचार किया गया।
भारत जापान संबंध क्यों हैं अहम?
भारत और जापान के बीच व्यापार, निवेश, हाई-टेक उद्योग, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में लगातार सहयोग बढ़ रहा है। यही वजह है कि भारत जापान संबंध दोनों देशों की विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत साझेदारी से क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास दोनों को फायदा मिलेगा।
ताकाइची ने भारत दौरे को बताया खास
भारत रवाना होने से पहले सनाए ताकाइची ने कहा था कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत के साथ सहयोग पहले से अधिक जरूरी हो गया है। उन्होंने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और रणनीतिक हितों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह यात्रा भारत जापान संबंध को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगी और दोनों देशों के सहयोग को और मजबूत करेगी।
बैठक से क्या उम्मीदें हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस उच्चस्तरीय बैठक के बाद व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक सहयोग से जुड़े नए फैसले सामने आ सकते हैं। इससे दोनों देशों के बीच विश्वास और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलने की संभावना है।
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