पेरेंट्स बच्चे के साथ बैठकर होमवर्क में मदद करते हुए

बच्चों को वर्क कराते समय पेरेंट्स की छोटी-छोटी बातें कई बार बड़ा असर डाल देती हैं। homework अक्सर घर में तनाव का time बन जाता है। पेरेंट्स थके होते हैं, बच्चे थके होते हैं, और दोनों के बीच बात-बात पर टकराव शुरू हो जाता है। लेकिन कुछ शोध और पेरेंटिंग एक्सपर्ट्स बताते हैं कि वर्क के दौरान बोले गए कुछ आम वाक्य बच्चे की पढ़ाई में दिलचस्पी को धीरे-धीरे कम कर सकते हैं।

इन 3 वाक्यों से बचें:

होमवर्क के समय बच्चे को “तुम्हें कुछ नहीं आता”, उसकी तुलना दूसरे बच्चों से करना, या उसे “अभी बिज़ी हूं” कहकर टाल देना, तीनों ही आदतें बच्चे का आत्मविश्वास कम करती हैं और पढ़ाई से जुड़ी उसकी दिलचस्पी घटा सकती हैं। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि इसकी जगह बच्चे के प्रयास और व्यवहार पर बात करें, न कि उसकी काबिलियत पर।

होमवर्क के समय ध्यान रखने वाली 5 बातें

  • बच्चे की काबिलियत पर लेबल लगाने वाले वाक्य (जैसे “तुम्हें समझ नहीं आता”) आत्मविश्वास कम करते हैं
  • दूसरे बच्चों से तुलना करना बच्चे को असुरक्षित महसूस करा सकता है
  • बच्चे को बार-बार टालना या “बिज़ी हूं” कहना उसे अनसुना महसूस कराता है
  • होमवर्क में जरूरत से ज्यादा दखल देना भी नुकसान कर सकता है
  • तारीफ और सुधार दोनों में बच्चे के प्रयास पर फोकस रखना फायदेमंद है

पहली बात: “तुम्हें कुछ नहीं आता” या “यह तो इतना आसान है”

जब कोई बच्चा किसी सवाल में अटक जाता है, तो कई पेरेंट्स गुस्से में कह देते हैं कि उसे कुछ समझ नहीं आता या यह सवाल तो बहुत आसान है। डेलावेयर यूनिवर्सिटी की कोऑपरेटिव एक्सटेंशन गाइड के मुताबिक, इस तरह के जवाब बच्चे को यह महसूस कराते हैं कि पेरेंट्स उसे किसी काम के लायक नहीं समझते, जबकि बच्चे के भरोसे के लिए जरूरी है कि उसे उसकी कोशिशों के लिए सराहा जाए, न कि नतीजे के लिए आंका जाए।

इसकी जगह बेहतर तरीका यह है कि बच्चे से पूछें कि वह कहां अटक रहा है, और साथ मिलकर उस हिस्से को समझने की कोशिश करें। इससे बच्चे को लगता है कि गलती सीखने का हिस्सा है, कोई कमी नहीं।

दूसरी बात: “देखो फलां कितना अच्छा कर लेता है”

भाई-बहन या दोस्त से तुलना करना पेरेंट्स को कई बार बच्चे को प्रेरित करने का आसान तरीका लगता है, लेकिन असल में यह उल्टा असर डालता है। बच्चा पढ़ाई को अपनी पहचान से जोड़ने की बजाय दूसरों से पीछे रहने के डर से जोड़ने लगता है। इससे पढ़ाई एक दबाव बन जाती है, न कि सीखने का जरिया।

बेहतर विकल्प है कि बच्चे की तुलना उसके अपने पिछले प्रदर्शन से करें, जैसे “पिछली बार से आज तुमने ज्यादा ध्यान लगाया।” इससे बच्चे को अपनी प्रगति दिखती है, बिना किसी और से मुकाबले के दबाव के।

तीसरी बात: “अभी बिज़ी हूं” या बार-बार टालना

स्कूल के बाद बच्चे अक्सर अपने दिन की कोई बात या सवाल साझा करना चाहते हैं, और अगर पेरेंट्स बार-बार “अभी बिज़ी हूं” कहकर टाल देते हैं, तो बच्चे को लगता है कि उसकी बात मायने नहीं रखती। एडुटोपिया में प्रकाशित एक शिक्षकों के लिए बनाई गई गाइड में भी इसी तरह के टालने वाले जवाबों से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि इनसे सामने वाला खुद को नज़रअंदाज़ महसूस करता है।

अगर सच में समय नहीं है, तो सीधे टालने की बजाय यह बताना बेहतर है कि आप कब बात कर पाएंगे, जैसे “अभी थोड़ा काम है, दस मिनट बाद पूरी बात सुनूंगा।” इससे बच्चे को भरोसा रहता है कि उसकी बात अनसुनी नहीं होगी।

जरूरत से ज्यादा दखल भी नुकसानदेह

स्कोलास्टिक पर प्रकाशित एक लेख में बताया गया है कि करीब 30 साल के शोध की समीक्षा में शोधकर्ताओं ने पाया कि होमवर्क में पेरेंट्स की जरूरत से ज्यादा दिलचस्पी अक्सर बच्चे के नंबर या ग्रेड सुधारने में मदद नहीं करती, और कई बार इसका उल्टा असर होता है। जब पेरेंट्स हर गलती खुद सुधार देते हैं या लगातार टोकते रहते हैं, तो बच्चे को खुद से सोचने और आत्मविश्वास बनाने का मौका नहीं मिल पाता, और इससे चिंता भी बढ़ सकती है।

इसका मतलब यह नहीं कि पेरेंट्स बिल्कुल दूर रहें, बल्कि यह है कि बच्चे को पहले खुद कोशिश करने दें, और सिर्फ अटकने पर मदद करें।

क्या करें: छोटे बदलाव, बड़ा फर्क

  • बच्चे से पूछें “कहां अटक रहे हो”, सीधे नतीजे पर टिप्पणी करने की बजाय
  • तुलना बच्चे के अपने पुराने प्रदर्शन से करें, दूसरों से नहीं
  • अगर व्यस्त हैं तो सीधे समय बताएं, सिर्फ टालें नहीं
  • गलती को सीखने के मौके की तरह देखें, कमी की तरह नहीं
  • होमवर्क के लिए शांत और तय समय-जगह रखें, ताकि थकान में टकराव कम हो

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या बच्चे की तारीफ करना गलत है? नहीं, लेकिन बहुत ज्यादा या बहुत सामान्य तारीफ (“गुड जॉब”) की जगह बच्चे के प्रयास की बारीकी बताकर तारीफ करना ज्यादा असरदार माना जाता है।

अगर बच्चा होमवर्क में बार-बार गलती करे तो क्या करें? गलती को बच्चे की पहचान से जोड़ने की बजाय, सिर्फ उस काम या हिस्से पर बात करें जिसमें सुधार चाहिए।

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