केरल का सबसे बड़ा फसल उत्सव ओणम इस साल 26 अगस्त 2026 को थिरुवोणम के साथ अपने चरम पर पहुंचा, और इसकी सबसे बड़ी पहचान है ओणम सद्या थाली। यह पारंपरिक शाकाहारी दावत केले के पत्ते पर परोसी जाती है और इसे हाथों से खाने की परंपरा है। ओणम सद्या थाली सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि केरल की मेहमाननवाजी और सदियों पुरानी पाक-परंपरा का प्रतीक मानी जाती है।
सद्या थाली में आखिर होता क्या है
पारंपरिक रूप से सद्या में 24 से 28 तक व्यंजन शामिल होते हैं, और आमतौर पर 26 पकवानों की संख्या सबसे ज्यादा प्रचलित मानी जाती है। हालांकि हर घर और क्षेत्र के हिसाब से यह संख्या थोड़ी अलग हो सकती है। थाली में मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कड़वा और कसैला जैसे सभी स्वाद संतुलित मात्रा में शामिल किए जाते हैं, ताकि भोजन पूरी तरह संतुलित और पाचन के लिए अनुकूल बने।
थाली के प्रमुख पकवान कौन-कौन से हैं
- परिप्पू: घी के साथ परोसी जाने वाली दाल, जिसे भोजन की नींव माना जाता है
- सांभर और रसम: सब्जियों और इमली के मेल से बना पारंपरिक शोरबा
- अवियल और ओलन: नारियल और सब्जियों से बने खास व्यंजन
- थोरन: बारीक कटी सब्जियों को नारियल के साथ भूनकर बनाया गया पकवान
- किचड़ी और पचड़ी: दही आधारित हल्के और ताजगी भरे व्यंजन
- इंजी पुली: अदरक और इमली से बना यह व्यंजन पाचन में मदद करता है
- पापड़म और केले के चिप्स: कुरकुरे साथी व्यंजन
- पायसम: मीठे में परोसा जाने वाला खीर जैसा व्यंजन, जो भोजन का सुखद समापन करता है
हर पकवान के पीछे छिपा है एक मकसद
सद्या की खासियत यह है कि हर व्यंजन का अपना एक उद्देश्य होता है। इंजी पुली पाचन को बेहतर बनाने के लिए परोसा जाता है, रसम पेट को पायसम के लिए तैयार करता है, परिप्पू को भोजन की नींव माना जाता है, और अंत में पायसम पूरे भोजन को एक मीठे और संतोषजनक अंदाज में समाप्त करता है। यह क्रम सदियों से चली आ रही पाक-वैज्ञानिक समझ को दर्शाता है।
ओणम सद्या थाली का सांस्कृतिक महत्व
सद्या सिर्फ स्वाद का उत्सव नहीं, बल्कि केरल की कृषि समृद्धि, सामूहिकता और आतिथ्य परंपरा का प्रतिबिंब भी है। केले के पत्ते पर सबको एक समान भाव से भोजन परोसना यह संदेश देता है कि उत्सव में सब बराबर हैं। परिवार और पड़ोसी एक साथ बैठकर इसे खाते हैं, जिससे यह त्योहार सामाजिक जुड़ाव का भी प्रतीक बन जाता है।
घर पर सद्या का आनंद कैसे लें
पूरे 26 पकवान बनाना हर घर के लिए संभव नहीं होता, लेकिन परिप्पू, सांभर, थोरन, पचड़ी और पायसम जैसे 5-6 प्रमुख व्यंजन बनाकर भी सद्या की भावना को घर पर जिंदा रखा जा सकता है। केले के पत्ते पर परोसने से त्योहार का पारंपरिक अहसास और भी बढ़ जाता है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सांस्कृतिक और पाक-परंपरा से जुड़े स्रोतों पर आधारित है। पकवानों की संख्या और सामग्री क्षेत्र व परिवार के अनुसार भिन्न हो सकती है।
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