छत्तीसगढ़ में मैन्युफैक्चरिंग निवेश और औद्योगिक विकास को दर्शाती तस्वीर

बरसों तक छत्तीसगढ़ को खनिज संपन्न राज्य के तौर पर जाना जाता रहा, जहां कोयला, लौह अयस्क जैसे कच्चे संसाधनों की खुदाई और शुरुआती प्रोसेसिंग ही उद्योग की रीढ़ थी.

अब यह तस्वीर बदल रही है — राज्य कच्चा माल बेचने वाले की जगह तैयार, हाई-वैल्यू उत्पाद बनाने वाले केंद्र की भूमिका में आना चाहता है. छत्तीसगढ़ हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग की तरफ इस कदम को हाल के महीनों में मिले भारी-भरकम निवेश प्रस्तावों से भी बल मिला है.

नीति का आधार: औद्योगिक विकास नीति 2024-30

इस बदलाव को दिशा राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 से मिली है. इस नीति के तहत स्थानीय संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, एआई, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, फार्मा, डिफेंस और इंजीनियरिंग जैसे नए क्षेत्रों में निवेश को खींचने पर जोर दिया गया.

मकसद यह है कि छत्तीसगढ़ केवल कच्चा माल भेजने वाला राज्य न रहे. इसकी जगह वह उन्नत तकनीक पर आधारित उद्योगों का ठिकाना बने.

करीब 8 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव आए

नीति लागू होने के बाद निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ा है. राज्य के निवेश प्रोत्साहन पोर्टल के आंकड़े बताते हैं कि पिछले लगभग डेढ़ साल में करीब 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं. इनसे 1.5 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है.

गौर करने वाली बात यह है कि इन प्रस्तावों का बड़ा हिस्सा परंपरागत खनिज उद्योगों से हटकर नए क्षेत्रों में जा रहा है. इनमें एआई, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं.

नवा रायपुर में एआई और डेटा सेंटर से जुड़े निवेश के साथ-साथ सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी 18,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रस्ताव आए हैं, जो राज्य की बदलती औद्योगिक सोच को दिखाते हैं.

इसी कड़ी में राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0) को मंजूरी मिल गई है. इससे 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश और लगभग 9,000 प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष नौकरियां मिलने का अनुमान है. यह क्लस्टर आने वाले वर्षों में इलाके की तस्वीर बदल सकता है.

अब ग्रीन स्टील पर दांव

स्टील उत्पादन में पहले से मजबूत पकड़ रखने वाला छत्तीसगढ़ इस सेक्टर में भी अगली पीढ़ी की तकनीक अपनाने की तैयारी में है. देशभर में कार्बन उत्सर्जन घटाने और साफ-सुथरे उत्पादन को बढ़ावा देने की मुहिम के बीच ग्रीन स्टील राज्य के लिए एक बड़ा मौका बनकर सामने आया है.

पिछले महीने आयोजित हुए छत्तीसगढ़ ग्रीन स्टील डायलॉग में करीब 13,840 करोड़ रुपये के निवेश के वादे मिले. इस आयोजन ने साफ कर दिया कि निवेशकों की दिलचस्पी अब सिर्फ पारंपरिक स्टील तक सीमित नहीं रह गई है.

देश में विशेष स्टील बनाने को बढ़ावा देने वाली पीएलआई जैसी योजनाएं भी पहले से चल रही हैं. छत्तीसगढ़ अपने खनिज भंडार, बरसों पुराने स्टील उद्योग और ऊर्जा क्षमता का इस्तेमाल करके ज्यादा कीमत वाले स्टील उत्पाद बनाने में इसका फायदा उठा सकता है.

फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स में उभरता मौका

फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर भी राज्य की बदलती औद्योगिक तस्वीर में अपनी जगह बना रहा है. पिछले करीब 18 महीनों में इस क्षेत्र में लगभग 992.53 करोड़ रुपये के प्रस्ताव आए, जिनमें से 216 करोड़ रुपये की लागत वाली चार परियोजनाएं फिलहाल जमीन पर उतर रही हैं.

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भी देश स्तर पर तेजी देखी जा रही है. केंद्र की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के जरिए पूरे देश में 69,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को हरी झंडी मिल चुकी है.

छत्तीसगढ़ का EMC 2.0 जैसा कदम राज्य को इस राष्ट्रीय सप्लाई चेन में जगह दिलाने का जरिया बन सकता है. आने वाले समय में इससे और कंपोनेंट निर्माताओं के राज्य में आने की उम्मीद है.

कच्चे माल से बने उत्पाद तक का सफर

औद्योगिक विकास की यह रणनीति सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. बस्तर और सरगुजा जैसे इलाकों में वन उपज, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय संसाधनों पर टिके छोटे उद्योगों के जरिए क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की कोशिश भी साथ-साथ चल रही है.

इससे गांव-कस्बों में भी रोजगार और छोटे कारोबार के मौके बढ़ सकते हैं. सरकार का मानना है कि बड़े और छोटे, दोनों तरह के उद्योगों को साथ लेकर चलने से ही यह बदलाव टिकाऊ बन पाएगा.

निवेश प्रस्तावों को हकीकत में बदलने के लिए सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम, राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (SIPB) और ऑनलाइन मंजूरी की प्रक्रिया को और मजबूत किया है. 100 करोड़ रुपये से बड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर तेज मंजूरी दिलाने की व्यवस्था भी बनाई गई है, ताकि कागजी प्रक्रिया निवेशकों के लिए बाधा न बने.

छत्तीसगढ़ के पास खनिज, ऊर्जा और औद्योगिक अनुभव की ताकत पहले से है. अब चुनौती इन्हीं संसाधनों के दम पर ऊंची कीमत वाले, तैयार उत्पाद बनाने की है.

इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर ग्रीन स्टील और फार्मा से लेकर एआई तक बढ़ता निवेश यही संकेत देता है कि राज्य अपनी औद्योगिक दिशा बदलने की तैयारी में जुटा है. छत्तीसगढ़ हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग की इस दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है.