आंगनबाड़ी में दिया जा रहा रूचिकर स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन
रायपुर। छोटे बच्चों का भोजन पौष्टिक होने के साथ रूचिकर और स्वादिष्ट भी होना चाहिए। बच्चे इससे अच्छी तरह भोजन करते हैं और उन्हें खाने के प्रति अरूचि नहीं होती। बच्चों के खान-पान संबंधित व्यवहार और उनकी रूचि को ध्यान में रखते हुए आंगनबाडिय़ों में स्थानीय पौष्टिक आहार को बच्चों के स्वाद के अनुसार बनाकर उन्हें खिलाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इसके बारे में महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पोषण दूत शिशुवती माताओं को भी जागरूक कर रही हैं।
स्थानीय रागी, कोदो, दलिया, मूंगफली, गुड़ से अलग-अलग प्रकार के बने व्यंजन अब बच्चे चाव से खाने लगे हैं। इससे बच्चों को सभी पोषक आहार मिलने के साथ उनकी खाने के प्रति रूचि भी बढऩे लगी हैं। इसका सकारात्मक असर भी दिखाई देने लगा है। आगंनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं और सुपोषण दूत लगातार बच्चों के पोषण स्तर को बनाए रखने और लोगों को सुपोषण के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रही हैं। इससे माताएं अपने बच्चों को आवश्यक मात्रा में पौष्टिक आहार देने लगी हैं।
प्रसंस्करण इकाई से ग्रामीणों को अच्छी आमदनी
राज्य सरकार किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार द्वारा धान सहित कोदो-कुटकी को समर्थन मूल्य में खरीदी तथा रूरल इंडस्ट्रियल प्लान के तहत स्थापित प्रसंस्करण इकाई से ग्रामीणों को अच्छी आमदनी हो रही है। जिला प्रशासन के सहयोग से कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर में कोदो-कुटकी, रागी व अन्य लघु धान्य फसलों के लिए प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की गई है। स्थापना के केवल छह माह में ही प्रसंस्करण इकाई में कार्यरत स्व सहायता समूह की महिलाओं को लगभग दो लाख 36 हजार रूपए की कमाई हो चुकी हैं।
महिलाओं को मिल रहा रोजगार
प्रसंस्करण इकाई के संचालन के लिए लघु धान्य फसलों का उत्पादन करने वाले क्षेत्र के किसानों एवं महिलाओं का समूह बनाया गया है। समूह के माध्यम से कृषकों के उत्पाद को संग्रहण कर प्रसंस्करण इकाई में महिला समूह द्वारा प्रसंस्करण कर पैकेजिंग किया जा रहा है। आंगनबाडिय़ों के माध्यम से रक्त अल्पतता से ग्रसित व गर्भवती महिलाओं तथा कुपोषित बच्चों को ‘कोदो चांवल की खिचड़ीÓ रागी का हलवा के रूप में प्रदाय किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से महिलाओं एवं बच्चों को जहां लघु धान्य फसलों के प्रसंस्कृत उत्पाद से पौष्टिक एवं गरम भोजन मिल रहा है, वहीं संग्रहण एवं प्रसंस्करण कार्य में लगीं महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी प्राप्त हो रहा है।
दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में होता है उत्पादन
गौरतलब है कि दुर्गम आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में कम उपजाऊ, उच्चहन एवं कंकरीली जमीन पर किसानों द्वारा कोदो-कुटकी, रागी की फसल ली जाती है। ऐसे जमीनों में अन्य फसलों का उत्पादन अच्छे से नहीं हो पाता है। कोदो-कुटकी, रागी में पोषक तत्व प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। इन्हीं गुणों को ध्यान में रखते हुए इन फसलों के उत्पादन एवं प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कांकेर में लघु धान्य (कोदो-कुटकी, रागी) प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की गई है। स्थापना के बाद से ही इस प्रसंस्करण इकाई में लगातार कोदो-कुटकी एवं रागी का प्रसंस्करण किया जा रहा है।


