कारीगरों, इंजीनियरों और व्यापारियों के लिए खास मानी जाने वाली विश्वकर्मा जयंती 2026 इस बार 17 सितंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी. यह दिन कन्या संक्रांति के साथ पड़ता है, यानी जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है. आइए जानते हैं इस पर्व से जुड़ी सारी जरूरी जानकारी.
विश्वकर्मा जयंती 2026 का मुहूर्त क्या है
पूजा का व्यापक मुहूर्त सुबह 7:15 बजे से शाम 4:15 बजे तक बताया जा रहा है. हालांकि सटीक समय आपके शहर और स्थान के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है, इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग जरूर देख लें.
भगवान विश्वकर्मा को क्यों पूजा जाता है
भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का दिव्य शिल्पकार और वास्तुकार माना गया है. इस दिन खासतौर पर कारीगर, मिस्त्री, इंजीनियर, फैक्ट्री मालिक और व्यापारी अपने औजारों, मशीनों और कार्यस्थल की पूजा करते हैं, ताकि आने वाला समय काम-धंधे के लिए शुभ साबित हो.
पूजा के लिए किन चीज़ों की जरूरत होगी
भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर, लाल कपड़ा, केले के पत्ते, आम के पत्ते, कलश, नारियल, फूल, अगरबत्ती और मिठाई, यह सामान्य तौर पर पूजा में इस्तेमाल होने वाली मुख्य सामग्री है.
पूजा विधि की पूरी जानकारी
सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और सबसे पहले कार्यस्थल या फैक्ट्री की अच्छी तरह सफाई करें. इसके बाद सभी औजारों और मशीनों को साफ करके पूजा स्थल पर सजाएं. भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर के सामने दीपक जलाएं, फूल-मिठाई अर्पित करें और कार्यस्थल की तरक्की के लिए प्रार्थना करें.
छत्तीसगढ़ में इस पर्व की परंपरा
छत्तीसगढ़ के औद्योगिक और कारोबारी इलाकों में विश्वकर्मा जयंती को खासे उत्साह से मनाया जाता है. कई फैक्ट्रियों और छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों में इस दिन मशीनें रोककर पूरे स्टाफ के साथ पूजा का आयोजन किया जाता है, जो कामकाजी समुदाय की एक पुरानी परंपरा है.
तैयारी पहले से क्यों जरूरी है
यह पर्व सीधे तौर पर कामकाजी और व्यापारिक वर्ग से जुड़ा है, इसलिए पूजा सामग्री, फूल-मालाओं और पंडित जी की बुकिंग पहले से कर लेना बेहतर रहता है, खासकर उन इलाकों में जहां इस दिन मांग काफी बढ़ जाती है.
अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य पारंपरिक और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है. सटीक तिथि, मुहूर्त और विधि के लिए स्थानीय पंचांग या पंडित से परामर्श अवश्य लें.
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