टायरोसिन और पुरुषों की उम्र पर रिसर्च दिखाता लैब में ब्लड सैंपल टेस्ट

फोकस और मानसिक एनर्जी बढ़ाने के लिए कई लोग सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं. इनमें टायरोसिन नाम का अमीनो एसिड काफी लोकप्रिय माना जाता है. लेकिन एक बड़ी नई स्टडी ने इसे लेकर चिंता बढ़ा दी है. करीब 2.7 लाख लोगों पर हुई इस रिसर्च में पाया गया कि खून में टायरोसिन का बढ़ा स्तर पुरुषों की उम्र घटा सकता है. दिलचस्प बात यह है कि यह असर महिलाओं में उतना नहीं दिखा. यही वजह है कि टायरोसिन और पुरुषों की उम्र के बीच का यह कनेक्शन अब वैज्ञानिकों के लिए दिलचस्पी का विषय बन गया है.

टायरोसिन आखिर होता क्या है

टायरोसिन एक तरह का अमीनो एसिड है, जो प्रोटीन से भरपूर खानपान में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है. यह दिमाग की सतर्कता और फोकस बढ़ाने के लिए सप्लीमेंट के रूप में भी बेचा जाता है. कई लोग परीक्षा, काम के दबाव या लंबी ड्यूटी के दौरान इसे इस्तेमाल करते हैं. शरीर में यह डोपामिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर बनाने में मदद करता है.

स्टडी ने दिखाया टायरोसिन और पुरुषों की उम्र का कनेक्शन

शोधकर्ताओं ने बड़े पैमाने के डेटा का विश्लेषण किया, जिसमें ऑब्ज़र्वेशनल और जेनेटिक, दोनों तरीके अपनाए गए. नतीजों में पाया गया कि खून में टायरोसिन का बढ़ा स्तर पुरुषों की औसत उम्र लगभग एक साल तक घटा सकता है. महिलाओं में यह असर साफ तौर पर नहीं दिखा. शुरुआत में एक और अमीनो एसिड फेनिलएलनिन को भी जोखिम से जोड़कर देखा गया था, लेकिन गहराई से जांच में सिर्फ टायरोसिन का असर मजबूत पाया गया.

क्यों अलग है पुरुषों और महिलाओं का असर

वैज्ञानिक अभी इस अंतर की सटीक वजह पर काम कर रहे हैं. शुरुआती अनुमान है कि हार्मोनल फर्क और मेटाबॉलिज्म के अलग तरीके इसकी वजह हो सकते हैं. फिलहाल यह पूरी तरह साबित नहीं हुआ है, लेकिन आंकड़े इतने बड़े हैं कि इसे नजरअंदाज करना मुश्किल है.

सप्लीमेंट लेने वालों के लिए क्या है चेतावनी

जो पुरुष लंबे समय से टायरोसिन सप्लीमेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके लिए यह स्टडी एक अलर्ट की तरह है. इसका मतलब यह नहीं कि हर किसी को तुरंत सप्लीमेंट बंद कर देना चाहिए. लेकिन बिना जरूरत लंबे समय तक हाई-डोज़ सप्लीमेंट लेना सही विकल्प नहीं माना जा रहा. किसी भी सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहता है.

आगे क्या रिसर्च होनी बाकी है

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एक बड़ा डेटा-आधारित संकेत है, न कि अंतिम निष्कर्ष. आने वाले समय में और गहराई से क्लिनिकल स्टडीज़ की जरूरत होगी, ताकि यह साफ हो सके कि टायरोसिन का सीधा असर उम्र पर पड़ता है या यह किसी और वजह से जुड़ा हुआ है. तब तक विशेषज्ञ संतुलित खानपान और जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट न लेने की सलाह दे रहे हैं.

अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य ज्ञानवर्धन के लिए है, यह चिकित्सकीय सलाह नहीं है. कोई भी सप्लीमेंट शुरू करने या बंद करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

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