घर में बच्चे को स्क्रीन से दूर रखने की कोशिश करने वाले पेरेंट्स अक्सर खुद अपने फोन में व्यस्त रहते हैं. एक नई रिसर्च ने इसी आदत की तरफ इशारा किया है. बच्चों की भाषा विकास पेरेंट्स फोन इस्तेमाल से किस तरह जुड़ी है, इसे लेकर सामने आए नतीजे हर माता-पिता के लिए जानना जरूरी है.
स्टडी किस पर आधारित है
यह एक बड़ा अध्ययन है, जिसमें करीब 747 बच्चों को शामिल किया गया. अध्ययन की शुरुआत में इन बच्चों की औसत उम्र करीब पांच साल थी, और शोधकर्ताओं ने इन्हें कई सालों तक फॉलो किया. इस दौरान बच्चों की भाषा क्षमता, खासकर सुनकर समझने वाली शब्दावली, को अलग-अलग समय पर मापा गया. साथ ही यह भी दर्ज किया गया कि बच्चों का अपना स्क्रीन इस्तेमाल कितना है, और उनके मुख्य अभिभावक का फोन इस्तेमाल कितना है.
नतीजों में क्या सामने आया
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि बच्चों के अपने स्क्रीन इस्तेमाल का ज्यादातर मामलों में भाषा विकास पर कोई खास असर नहीं दिखा. लेकिन जिन बच्चों के मुख्य अभिभावक ज्यादा समय फोन पर बिताते थे, उन बच्चों में सुनकर समझने वाली शब्दावली की बढ़त धीमी पाई गई. यानी बच्चे की भाषा सीखने की रफ्तार पर बच्चे के अपने फोन से ज्यादा, माता-पिता के फोन इस्तेमाल का असर दिखा.
डिवाइस मालिकाना हक पर भी असर
अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिन बच्चों के पास पांच साल की उम्र में अपना खुद का डिजिटल डिवाइस था, उनकी शुरुआती शब्दावली और व्याकरण का स्कोर बाकी बच्चों से कम था. हालांकि डिवाइस होने से आगे की भाषा विकास की रफ्तार धीमी नहीं हुई, यह असर सिर्फ शुरुआती स्तर पर ही देखा गया.
क्या इसका मतलब है कि फोन बच्चों को नुकसान पहुंचाता है
शोधकर्ताओं ने साफ किया है कि इस अध्ययन से यह साबित नहीं होता कि फोन का इस्तेमाल सीधे तौर पर भाषा विकास को कमजोर बनाता है. यह सिर्फ एक संबंध दिखाता है, कारण नहीं. फिर भी शोधकर्ताओं का मानना है कि परिवार के स्तर पर स्क्रीन इस्तेमाल की आदतें बच्चों के भाषा विकास का आकलन करते समय एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकती हैं.
पेरेंट्स के लिए इसका क्या मतलब है
छोटे बच्चों की भाषा सबसे ज्यादा घर के माहौल और बातचीत से सीखी जाती है. जब माता-पिता फोन में व्यस्त रहते हैं, तो बच्चों के साथ आंखों से आंख मिलाकर बातचीत और कहानी सुनाने का समय अपने आप कम हो जाता है. यही रोजमर्रा की बातचीत बच्चे की शब्दावली बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है. इसलिए बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने से पहले खुद अपने फोन इस्तेमाल की आदतों पर गौर करना भी उतना ही जरूरी है.
घर में क्या बदलाव लाए जा सकते हैं
खाने की मेज पर या बच्चों के साथ खेलते समय फोन दूर रखने की आदत डालना एक अच्छी शुरुआत हो सकती है. रोज कुछ समय बच्चे के साथ बिना स्क्रीन के बातचीत करना, कहानियां सुनाना और सवाल-जवाब करना उनकी भाषा क्षमता को मजबूत बना सकता है. यह छोटे-छोटे बदलाव लंबे समय में बच्चे के सीखने और समझने की क्षमता पर सकारात्मक असर डाल सकते हैं.
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और यह विशेषज्ञ सलाह का विकल्प नहीं है. बच्चे के विकास से जुड़ी किसी भी चिंता के लिए बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें.
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