मोटापा, प्री-डायबिटीज़ और फैटी लिवर आजकल हर उम्र में तेजी से बढ़ती समस्याएं बन चुकी हैं. ऐसे में सही डाइट चुनना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि हर तरफ अलग-अलग दावे सुनने को मिलते हैं. हाल ही में हुई एक क्लिनिकल स्टडी ने इस उलझन को कुछ हद तक सुलझाने की कोशिश की है. कीटो डाइट फैटी लिवर की समस्या में कितनी कारगर साबित होती है, इसे लेकर नए आंकड़े सामने आए हैं.
स्टडी में क्या किया गया
यह शोध एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित हुआ है. इसमें 42 ऐसे लोगों को शामिल किया गया, जो मोटापे, प्री-डायबिटीज़ और फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहे थे. इन सभी को तीन समूहों में बांटा गया. एक समूह को कीटोजेनिक डाइट दी गई, दूसरे को मेडिटेरेनियन डाइट, और तीसरे को लो-फैट, प्लांट-आधारित डाइट पर रखा गया. रिसर्च टीम ने खुद सभी का खाना तैयार करके दिया, ताकि नतीजे सटीक आएं. हर हफ्ते एक डाइटीशियन प्रतिभागियों से मिलकर उन्हें अपनी डाइट पर टिके रहने में मदद करता रहा.
नतीजे किस ओर इशारा करते हैं
तीनों ही समूहों में शामिल लोगों ने करीब 10 प्रतिशत शरीर का वजन कम किया, जो अपने आप में एक सकारात्मक संकेत है. लेकिन लिवर की चर्बी घटाने के मामले में कीटो डाइट बाकी दोनों से आगे निकल गई. कीटो डाइट अपनाने वालों में लिवर की चर्बी औसतन 67 प्रतिशत तक घटी, जबकि मेडिटेरेनियन और प्लांट-आधारित डाइट लेने वालों में यह कमी करीब 45 प्रतिशत ही रही.
प्री-डायबिटीज़ पर भी दिखा असर
नतीजों में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया. कीटो डाइट अपनाने वाले करीब आधे प्रतिभागी अब प्री-डायबिटीज़ की श्रेणी में नहीं आते. वहीं मेडिटेरेनियन डाइट वालों में यह आंकड़ा करीब 29 प्रतिशत रहा, और प्लांट-आधारित डाइट वालों में सिर्फ 7 प्रतिशत लोगों को ही यह फायदा मिला. इससे पता चलता है कि सिर्फ वजन घटाना ही काफी नहीं, बल्कि डाइट का प्रकार भी शरीर के अंदरूनी स्वास्थ्य पर बड़ा असर डालता है.
क्या इसका मतलब है कि सभी को कीटो अपनाना चाहिए
बिल्कुल नहीं. यह स्टडी सिर्फ 42 लोगों पर की गई थी, और इसमें सभी का खाना नियंत्रित तरीके से तैयार किया गया था. असल जिंदगी में कीटो डाइट को लंबे समय तक अपनाना कई लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत कम रखनी पड़ती है. इसके अलावा हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है. जिन लोगों को किडनी, हृदय या पाचन से जुड़ी कोई बीमारी है, उनके लिए कीटो डाइट सही विकल्प नहीं भी हो सकती.
किन बातों का रखें ध्यान
अगर आप फैटी लिवर या प्री-डायबिटीज़ की समस्या से जूझ रहे हैं और डाइट बदलने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लेना जरूरी है. डाइट के साथ-साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव कम करना भी लिवर की सेहत के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है. कोई भी डाइट प्लान बिना विशेषज्ञ की सलाह के लंबे समय तक अपनाना नुकसानदायक साबित हो सकता है.
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और यह चिकित्सीय सलाह नहीं है. किसी भी डाइट में बदलाव करने से पहले कृपया डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन से संपर्क करें.
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