टाइम रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग ब्लड शुगर पर असर दिखाता हेल्थ इन्फोग्राफिक

डायबिटीज़ से जूझ रहे लोगों के लिए एक उम्मीद जगाने वाली रिसर्च सामने आई है. शिकागो की एक टीम ने टाइम रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग ब्लड शुगर पर कैसा असर डालती है, इसे जानने के लिए टाइप 1 डायबिटीज़ और मोटापे से जूझ रहे 32 लोगों पर छह महीने तक एक स्टडी की. नतीजों ने यह साबित किया कि सिर्फ खाने का समय बदलकर भी ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद मिल सकती है.

स्टडी कैसे की गई

शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को तीन ग्रुप में बांटा. एक ग्रुप को दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे के बीच ही खाना खाने की छूट दी गई, बिना कैलोरी गिनती के. दूसरे ग्रुप की कैलोरी में 25 प्रतिशत की कटौती की गई, जबकि तीसरा ग्रुप कंट्रोल के तौर पर अपनी सामान्य आदतों के साथ बना रहा.

टाइम रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग ब्लड शुगर पर कैसा असर डालती है

नतीजों में सामने आया कि आठ घंटे की विंडो में खाना खाने वाले ग्रुप का HbA1c लेवल कैलोरी-कटौती वाले ग्रुप के मुकाबले 0.46 प्रतिशत ज्यादा घटा. यह अंतर छोटा भले लगे, लेकिन डायबिटीज़ मैनेजमेंट के लिहाज से यह एक अहम सुधार माना जाता है. सबसे राहत की बात यह रही कि इस दौरान डायबिटिक कीटोएसिडोसिस, गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया या हाइपरग्लाइसीमिया जैसी खतरनाक जटिलताओं में कोई इजाफा नहीं देखा गया.

वजन पर क्या असर पड़ा

टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग ग्रुप का वजन औसतन 2.19 प्रतिशत तक कम हुआ, जबकि कैलोरी-कटौती ग्रुप में यह गिरावट केवल 0.47 प्रतिशत रही. हालांकि यह अंतर आंकड़ों के लिहाज से बहुत बड़ा नहीं माना गया, फिर भी यह ट्रेंड टाइम-रिस्ट्रिक्टेड अप्रोच के पक्ष में दिखा.

शोधकर्ताओं ने क्या कहा

इस रिसर्च का नेतृत्व करने वालीं किनेसियोलॉजी और न्यूट्रिशन प्रोफेसर क्रिस्टा वराडी लंबे समय से इंटरमिटेंट फास्टिंग पर काम कर रही हैं. उनके मुताबिक यह पहली ऐसी स्टडी है जिसमें टाइप 1 डायबिटीज़ वाले लोगों पर इंटरमिटेंट फास्टिंग के असर को परखा गया, और इसके नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे हैं.

किन बातों का रखें ध्यान

  • यह तरीका बिना डॉक्टर की सलाह के अपनाना टाइप 1 डायबिटीज़ मरीजों के लिए जोखिम भरा हो सकता है
  • इंसुलिन डोज़ में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है, जो डॉक्टर की निगरानी में ही तय होना चाहिए
  • यह एक छोटी स्टडी है, बड़े स्तर पर और शोध की जरूरत है
  • खाने की टाइमिंग बदलने से पहले अपने एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से जरूर बात करें

अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है, यह चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. टाइप 1 डायबिटीज़ जैसी गंभीर स्थिति में किसी भी बदलाव से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

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