तीज मिलन उत्सव में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। आयोजन में पारंपरिक तीजा पर्व की आत्मीयता दिखाई देगी। साथ ही, स्थानीय परंपराओं और व्यंजनों को भी विशेष स्थान मिलेगा।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह अपनी धर्मपत्नी वीणा सिंह के साथ पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी धर्मपत्नी कौशल्या देवी साय के साथ मौजूद रहेंगे। इसके अलावा कई मंत्री और जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल होंगे।
यह आयोजन छत्तीसगढ़िया संस्कृति के संरक्षण से जुड़ा है। साथ ही, यह नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का प्रयास है। ऐसे आयोजन लोक विरासत को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।
तीज मिलन उत्सव में दिखेगी पारंपरिक झलक
मंत्री टंक राम वर्मा ने पर्वों के सामाजिक महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक तिहार समाज को जोड़ने का काम करते हैं। इनमें प्रेम, भाईचारा और सामाजिक समरसता की भावना मजबूत होती है।
तीज मिलन उत्सव में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद मिलेगा। इसके अलावा लोक-संस्कृति से जुड़े रंग भी देखने को मिलेंगे। तीजा पर्व के आत्मीय अनुष्ठान भी आयोजन का हिस्सा होंगे।
इस कार्यक्रम के जरिए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने का प्रयास है। साथ ही, आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने पर जोर रहेगा।
कई प्रमुख हस्तियां होंगी शामिल
कार्यक्रम में प्रदेश की कई प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी रहेगी। विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के साथ कई मंत्री भी पहुंचेंगे। जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक भी आयोजन में शामिल होंगे।
आयोजन से जुड़ी प्रमुख जानकारी:
- तारीख: 22 सितंबर 2026, मंगलवार
- समय: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक
- स्थान: एम.-12, सेक्टर-24, अटल नगर, नवा रायपुर
- मेजबानी: मंत्री टंक राम वर्मा
- प्रमुख अतिथि: डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
- आयोजन का उद्देश्य: लोक-संस्कृति और पारंपरिक तिहारों का संरक्षण
नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने की पहल
छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पर्व सामाजिक जुड़ाव का माध्यम रहे हैं। इनमें परिवार और समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण रहती है। तीज मिलन उत्सव इसी सांस्कृतिक भावना को आगे बढ़ाएगा।
आयोजन में तीजा पर्व की परंपराओं के साथ स्थानीय खानपान भी देखने को मिलेगा। लोक संस्कृति के विभिन्न रंग कार्यक्रम को खास बनाएंगे। वहीं, पारंपरिक रीति-रिवाजों की झलक भी लोगों को मिलेगी।
कुल मिलाकर, नवा रायपुर का यह आयोजन संस्कृति और परंपरा का संगम बनेगा। इससे छत्तीसगढ़ की लोक विरासत को नई पहचान मिलेगी। साथ ही, युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ सकेगी।
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