दुनिया की औसत उम्र: ग्लोब के सामने टहलते बुज़ुर्ग दंपती, पास में 73.3 और 62.8 साल लिखा ग्राफिक

कोविड के झटके के बाद दुनिया की औसत उम्र लगभग पुराने स्तर पर लौट आई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2 अक्टूबर 2026 को ग्लोबल हेल्थ एस्टिमेट्स जारी किए. इनके मुताबिक 2023 में जन्म के समय औसत जीवन प्रत्याशा 73.3 साल रही. लेकिन सेहतमंद जीवन के साल अभी पूरी तरह नहीं लौटे.

दुनिया की औसत उम्र अभी कितनी है

WHO के अनुमान के मुताबिक 2023 में दुनिया की औसत उम्र 73.3 साल थी. 2019 में यह 73.4 साल थी. यानी कोविड से पहले का स्तर लगभग वापस आ गया है. हालांकि सेहतमंद जीवन प्रत्याशा 62.8 साल रही, जो 2019 के 63.2 साल से अब भी 0.4 साल कम है.

WHO रिपोर्ट के बड़े आंकड़े

  • 2023 में दुनिया की 74% मौतें गैर-संक्रामक बीमारियों से हुईं. 2000 में यह हिस्सा 58% था.
  • मौत की 10 सबसे बड़ी वजहों में से 8 गैर-संक्रामक बीमारियां हैं.
  • दिल की इस्केमिक बीमारी से 2023 में करीब 95 लाख मौतें हुईं.
  • डिमेंशिया मौत की 5वीं बड़ी वजह बन गया. 2000 में यह 19वें नंबर पर था.
  • 2019 से 2023 के बीच एंग्जायटी से जुड़ा बोझ करीब 45% और डिप्रेशन का करीब 20% बढ़ा.

दिल की बीमारी अब भी सबसे आगे

सबसे पहले बात दिल की. WHO के मुताबिक दिल और नसों की बीमारियां अब भी दुनिया में मौत और बीमारी के बोझ की सबसे बड़ी वजह हैं. इनमें इस्केमिक हृदय रोग सबसे अहम है. इसमें दिल तक खून पहुंचाने वाली नसें संकरी हो जाती हैं.

इस बीमारी ने 2023 में करीब 21 करोड़ सेहतमंद साल भी छीने. यानी नुकसान सिर्फ मौत तक सीमित नहीं है. हालांकि WHO यह भी मानता है कि 2000 के बाद कई इलाकों में इस बीमारी का बोझ काफी घटा है.

गैर-संक्रामक बीमारी का मतलब क्या है

दरअसल ये वो बीमारियां हैं जो एक इंसान से दूसरे में नहीं फैलतीं. दिल की बीमारी, स्ट्रोक, डायबिटीज़, कैंसर और डिमेंशिया इसके उदाहरण हैं. इन्हें अंग्रेज़ी में NCD कहते हैं.

पहले दुनिया में संक्रमण से ज़्यादा मौतें होती थीं. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. उदाहरण के लिए 2000 में गैर-संक्रामक बीमारियां 58% मौतों की वजह थीं. WHO के मुताबिक 2023 में पहली बार कम आय वाले देशों में भी संक्रामक बीमारियां आधी से कम मौतों की वजह रहीं.

डिमेंशिया इतना ऊपर कैसे पहुंचा

सीधे शब्दों में, डिमेंशिया यानी याददाश्त, सोचने और रोज़ के काम करने की क्षमता का धीरे-धीरे घटना. WHO के मुताबिक 2000 से 2023 के बीच इससे होने वाली मौतें तीन गुना हो गईं.

WHO की डिमेंशिया फैक्टशीट बताती है कि 2021 में दुनिया में करीब 5.7 करोड़ लोग इसके साथ जी रहे थे. इनमें से आधे से कहीं ज़्यादा, यानी 60% से अधिक, गरीब और मध्यम आमदनी वाले मुल्कों में रहते थे. साथ ही हर साल करीब एक करोड़ नए मामले आते हैं.

दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए क्या संकेत हैं

दरअसल भारत WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में आता है. रिपोर्ट के मुताबिक 2000 के बाद डायबिटीज़ से मौत का खतरा काफी बढ़ा है, खासकर दक्षिण-पूर्व एशिया में. इसके अलावा इस क्षेत्र में व्यक्ति के स्तर पर दिल की बीमारी का जोखिम भी बढ़ता दिखा. WHO इसे आबादियों के बीच दिल की सेहत में बनी असमानता का संकेत मानता है.

ध्यान रहे कि WHO की रिलीज़ में भारत के अलग आंकड़े नहीं दिए गए हैं. इसलिए देश-स्तर का हाल WHO के डेटा पोर्टल पर ही देखें. फिर भी यह संकेत भारत के परिवारों के लिए अहम है.

दुनिया की औसत उम्र के साथ सेहत कैसे बढ़ाएं

WHO के डायरेक्टर डॉ. एलेन लैब्रिक ने कहा कि लंबी उम्र जन स्वास्थ्य की बड़ी उपलब्धि है. उनके मुताबिक अगली चुनौती यह पक्का करना है कि बढ़े हुए साल अच्छी सेहत में बीतें.

इसलिए अपने स्तर पर कुछ बातें मदद कर सकती हैं. WHO की डिमेंशिया फैक्टशीट जोखिम घटाने के लिए ये कदम गिनाती है.

1. नियमित शारीरिक गतिविधि करें.

2. तंबाकू छोड़ें और शराब का नुकसानदेह सेवन न करें.

3. संतुलित खाना खाएं और वज़न काबू में रखें.

4. ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की जांच कराते रहें.

5. लोगों से मिलते-जुलते रहें और दिमाग को सक्रिय रखें.

इसके अलावा कम सुनाई देने पर हियरिंग एड का इस्तेमाल भी सूची में है.

मन की सेहत पर भी ध्यान क्यों ज़रूरी

रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में डिप्रेशन और एंग्जायटी ने मिलकर करीब 11 करोड़ सेहतमंद साल छीने. ऐसे में लगातार उदासी, घबराहट या नींद की दिक्कत को नज़रअंदाज़ न करें. अगर परेशानी हफ्तों तक बनी रहे, तो डॉक्टर या काउंसलर से बात करें.

दुनिया की औसत उम्र पर आम सवाल

जीवन प्रत्याशा और सेहतमंद जीवन प्रत्याशा में क्या फर्क है?

जीवन प्रत्याशा बताती है कि औसतन कितने साल जिएंगे. वहीं सेहतमंद जीवन प्रत्याशा बताती है कि उनमें से कितने साल पूरी सेहत में बीतेंगे. 2023 में दोनों के बीच करीब 10.5 साल का फर्क था.

क्या ये आंकड़े सटीक गिनती हैं?

नहीं. दरअसल ये देशों के रिकॉर्ड और सर्वे से बने अनुमान हैं. इसलिए इनमें कुछ अनिश्चितता रहती है.

डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें. किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यायाम में बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

यह भी पढ़े:

चबाने वाला तंबाकू 2023 में 2.51 लाख मौतों से जुड़ा, भारत समेत दक्षिण एशिया पर सबसे बड़ा बोझ