करम परब 2026

छत्तीसगढ़ में जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक विरासत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रायपुर में करम पूजा परब का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में शामिल होकर करम राजा की पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान उन्होंने रायपुर जिले के गनोद गांव में उरांव समाज के लिए 50 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन बनाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक पर्व समाज को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से प्रकृति के प्रति सम्मान, आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता जैसे मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है।

करम परब 2026 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश

राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम परिसर में उरांव (सरना) आदिवासी विकास संघ द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ किया और करम राजा की विधिवत पूजा की।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जनजातीय परंपराएं केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं हैं। इनमें पूर्वजों का ज्ञान, प्रकृति के साथ सामंजस्य और सामूहिक जीवन की भावना समाहित है। इन मूल्यों को सुरक्षित रखना समाज की साझा जिम्मेदारी है।

उरांव समाज के लिए 50 लाख रुपये के भवन की घोषणा

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण गनोद गांव में सामुदायिक भवन के निर्माण की घोषणा रही। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अनुसार, इसके लिए 50 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है।

प्रस्तावित भवन से उरांव समाज के लोगों को सामाजिक बैठकों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक आयोजनों के लिए स्थान उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे समाज के सदस्य एक साथ मिलकर अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ा सकेंगे।

हालांकि, भवन निर्माण की समयसीमा और कार्य शुरू होने की तारीख के बारे में उपलब्ध जानकारी में कोई विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

प्रकृति संरक्षण और सामाजिक एकता का प्रतीक है करम पर्व

करम पर्व जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। यह प्रकृति के प्रति आस्था, पारिवारिक खुशहाली और समाज में सहयोग की भावना को अभिव्यक्त करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वजों ने प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की जो परंपरा विकसित की, उससे आज भी प्रेरणा मिलती है। पर्यावरण का सम्मान करना और सामुदायिक संबंधों को मजबूत बनाए रखना इस पर्व के प्रमुख संदेशों में शामिल है।

नई पीढ़ी तक पहुंचेगी जनजातीय संस्कृति

मुख्यमंत्री ने पारंपरिक भाषा, लोकगीतों, लोकनृत्यों और रीति-रिवाजों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, आधुनिकता के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना भी जरूरी है।

ऐसे आयोजन युवाओं को अपने समाज के इतिहास और परंपराओं को समझने का अवसर देते हैं। वरिष्ठजनों के अनुभव और नई पीढ़ी की भागीदारी मिलकर सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रख सकते हैं।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा प्रोत्साहन

छत्तीसगढ़ की पहचान विभिन्न जनजातीय समुदायों की विशिष्ट परंपराओं, लोककलाओं और प्रकृति से जुड़े जीवनदर्शन से बनती है। इन परंपराओं का संरक्षण प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्यमंत्री ने उरांव समाज द्वारा अपनी विरासत को सहेजने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए समाज, संस्थाओं और नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी, उरांव (सरना) आदिवासी विकास संघ के प्रतिनिधि, समाज के वरिष्ठजन और बड़ी संख्या में समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे।

रायपुर में आयोजित करम पूजा परब ने जनजातीय संस्कृति के संरक्षण, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया। गनोद गांव में उरांव समाज के लिए 50 लाख रुपये के सामुदायिक भवन की घोषणा से सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है।

करम परब 2026 जैसे आयोजन अपनी सांस्कृतिक पहचान को समझने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का अवसर देते हैं। परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए सामुदायिक सहभागिता और निरंतर प्रयास महत्वपूर्ण हैं।

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