छत्तीसगढ़ हरित ऊर्जा

छत्तीसगढ़ अब बिजली उत्पादन के साथ स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है। राज्य सरकार ने आने वाले वर्षों के लिए बड़ी योजना बनाई है। इसके तहत वर्ष 2030 तक हरित ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 15 हजार मेगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए अगले पांच वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में करीब 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं जताई गई हैं। इससे नए उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

नई दिल्ली में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य की योजनाओं को प्रस्तुत किया। उन्होंने देश और विदेश के निवेशकों को प्रदेश में नई परियोजनाएं शुरू करने का न्योता दिया।

5.60 लाख करोड़ के निवेश से ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगी नई गति

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित वैश्विक सम्मेलन में छत्तीसगढ़ ने अपनी ऊर्जा क्षमता का प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चार दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्य में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए कई बड़ी परियोजनाओं पर काम करने की योजना है।

सरकार के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए करीब 1.33 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। वहीं, ताप विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग 3.27 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

इसके अलावा, ऊर्जा क्षेत्र की दूसरी परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य बिजली की जरूरत पूरी करने के साथ औद्योगिक विकास को मजबूत करना है।

2030 तक 15 हजार मेगावाट हरित ऊर्जा का लक्ष्य

राज्य सरकार ने स्वच्छ बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य तय किया है। फिलहाल प्रदेश की हरित ऊर्जा क्षमता लगभग 3 हजार मेगावाट बताई गई है।

इसे वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 15 हजार मेगावाट करने की योजना है। साथ ही, राज्य की कुल बिजली मांग में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य है।

इस दिशा में सौर ऊर्जा, जल विद्युत और बायोमास जैसे विकल्पों पर काम किया जाएगा। इससे पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

पंप स्टोरेज और बैटरी से मजबूत होगी बिजली व्यवस्था

बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल उत्पादन बढ़ाना ही काफी नहीं है। बिजली को जरूरत के समय उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य में ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। सरकार ने 12,300 मेगावाट क्षमता की 10 पंप स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाओं की पहचान की है।

इन परियोजनाओं में करीब 65 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। इसके अलावा, अगले दो वर्षों में 10 हजार मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी भंडारण प्रणाली स्थापित करने की योजना है।

राजनांदगांव में 100 मेगावाट की सौर परियोजना के साथ बैटरी स्टोरेज सिस्टम पहले से संचालित है। इससे जरूरत के अनुसार बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।

खैरा गांव बना सौर बिजली का उदाहरण

छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा का उपयोग अब गांवों तक पहुंच रहा है। राजनांदगांव जिले का खैरा गांव इसका अच्छा उदाहरण है।

यह राज्य का पहला पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित गांव बताया गया है। यहां 141 घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए गए हैं।

प्रत्येक घर में 2 किलोवाट क्षमता के पैनल लगाए गए हैं। इस तरह गांव में कुल 282 किलोवाट बिजली उत्पादन की व्यवस्था हुई है।

खास बात यह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने 93 घरों को भी सौर बिजली की सुविधा मिली है। इसके लिए ग्रामीणों को अपनी जेब से कोई पैसा नहीं देना पड़ा।

घरों और खेतों तक पहुंच रहा सौर ऊर्जा का लाभ

राज्य सरकार केवल बड़े बिजली संयंत्रों पर ही ध्यान नहीं दे रही है। आम परिवारों और किसानों को भी सौर ऊर्जा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश में लगभग 1.26 लाख सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।

वहीं, कृषि क्षेत्र में 1.66 लाख सौर सिंचाई पंपों से करीब 1.94 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो रही है।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 395 मेगावाट क्षमता के सौर संयंत्र लगाने की योजना है। इससे किसानों को बिजली की जरूरत पूरी करने के नए विकल्प मिल सकते हैं।

बायोगैस और ग्रीन हाइड्रोजन से खुलेंगे नए कारोबार

छत्तीसगढ़ में कृषि अवशेष, गोबर और जैविक संसाधनों की अच्छी उपलब्धता है। इनका उपयोग करके स्वच्छ ईंधन तैयार किया जा सकता है।

इसी संभावना को देखते हुए सरकार कंप्रेस्ड बायोगैस और बायो-एथेनॉल परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है। साथ ही, ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

प्रदेश में 80 मीट्रिक टन क्षमता वाले आठ कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है। इनमें लगभग 800 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

इसके अलावा, निजी निवेशकों से करीब 6 हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव मिले हैं। इन पर प्रक्रिया जारी है।

परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में भी निवेश की तैयारी

राज्य सरकार भविष्य की बिजली जरूरतों को देखते हुए ऊर्जा के अन्य स्रोतों पर भी विचार कर रही है।

इस योजना में करीब 4,200 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्र भी शामिल हैं। इन परियोजनाओं सहित विभिन्न ऊर्जा योजनाओं में लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है।

सरकार का प्रयास है कि बिजली उत्पादन के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाए। इसके लिए अलग-अलग ऊर्जा स्रोतों का संतुलित विकास करने की योजना है।

130 से अधिक देशों के सामने दिखाई छत्तीसगढ़ की ताकत

भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। यह आयोजन 2 से 5 नवंबर तक नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।

सम्मेलन में 40 से अधिक मंत्री, नीति निर्माता और ऊर्जा कंपनियों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क और यूनाइटेड किंगडम सहित कई देश इसमें भागीदार हैं।

छत्तीसगढ़ ने भी अपने विशेष स्टॉल के माध्यम से ऊर्जा परियोजनाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वहां प्रदर्शित योजनाओं का अवलोकन किया।

इसके साथ ही उन्होंने निवेशकों को राज्य की औद्योगिक नीतियों और उपलब्ध संसाधनों के बारे में बताया। सरकार ने निवेश के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता भी जताई।

नई ऊर्जा परियोजनाओं से बढ़ सकते हैं रोजगार के अवसर

ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश से राज्य के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिल सकती है। सौर पैनल, बैटरी, बायोगैस और बिजली उत्पादन से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिल सकता है।

इसके अलावा, तकनीकी सेवाओं, निर्माण और रखरखाव के काम में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

स्थानीय युवाओं को इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण और काम मिलने की संभावनाएं हैं। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ परियोजनाओं के शुरू होने और समय पर पूरा होने पर निर्भर करेगा।

छत्तीसगढ़ के ऊर्जा भविष्य के लिए क्यों अहम है यह योजना?

राज्य में कोयला आधारित बिजली उत्पादन की क्षमता पहले से 28 हजार मेगावाट से अधिक है। अब सरकार पारंपरिक ऊर्जा के साथ नए विकल्पों को भी विकसित करना चाहती है।

इससे बिजली की बढ़ती मांग पूरी करने और भविष्य की जरूरतों के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार करने में मदद मिल सकती है।

छत्तीसगढ़ हरित ऊर्जा की यह पहल राज्य को नई औद्योगिक पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। हालांकि, तय लक्ष्य हासिल करने के लिए निवेश, तकनीक और परियोजनाओं को समय पर पूरा करना जरूरी होगा।

निष्कर्ष: स्वच्छ बिजली के साथ विकास की नई राह

छत्तीसगढ़ सरकार ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के साथ स्वच्छ और आधुनिक तकनीकों को भी बढ़ावा दे रही है। सौर ऊर्जा, पंप स्टोरेज, बैटरी और बायोगैस जैसी परियोजनाएं इस योजना का अहम हिस्सा हैं।

वर्ष 2030 तक 15 हजार मेगावाट हरित ऊर्जा का लक्ष्य पूरा होने पर प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।

साथ ही, नए उद्योगों और रोजगार के अवसरों का रास्ता भी खुल सकता है। अब सबकी नजर इन योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन पर रहेगी।

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