मुख्यमंत्री गांधी जयंती के दिन छत्तीसगढ़ के गौठानों में गोबर से बिजली उत्पादन का करेंगे शुभारंभ
गोबर से अब गौठान और महिला समूहों को दोहरा लाभ
गोबर से उत्पादित बिजली होगी सस्ती प्रति यूनिट लागत 2.50 से 3 रूपया
छत्तीसगढ़ के गांव और गौठान अब गोबर की बिजली से जगमग होंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन बेमेतरा जिला मुख्यालय के बेसिक स्कूल मैदान में आयोजित किसान सम्मेलन में गोबर से बिजली उत्पादन की महत्वाकांक्षी और ऐतिहासिक परियोजना का शुभारंभ करेंगे। राज्य के कई गौठानों में गोबर से बिजली उत्पादन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल किसान सम्मेलन में ही बेमेतरा जिले को 477 करोड़ रूपए के विकास एवं निर्माण कार्याें की सौगात देंगे।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर का दिन छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अविस्मरणीय एवं ऐतिहासिक दिन होगा। मुख्यमंत्री श्री बघेल 2 अक्टूबर को बेमेतरा जिले के आदर्श गौठान राखी सहित दुर्ग जिले के सिकोला गौठान तथा रायपुर जिले के बनचरौदा गौठान में गोबर से विद्युत उत्पादन परियोजना का शुभारंभ करेंगे। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गौठानों में गोबर से विद्युत उत्पादन की परियोजना को लेकर बीते कई महीनों से तैयारियां की जा रही थी, जो 2 अक्टूबर को मूूर्तरूप लेने जा रही है। गोबर से सस्ती बिजली उत्पादन होने के साथ-साथ जैविक खाद का भी उत्पादन होगा। इससे गौठान समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को दोहरा लाभ होगा।
25 किलो गोबर व हजार लीटर बायोगैस से 2 केव्ही बिजली
गोबर से विद्युत उत्पादन के लिए गौठानों में बायो गैस प्लांट, स्क्रबर एवं जेनसेट स्थापित किए गए हैं। बायो गैस टांके में गोबर एवं पानी डालकर बायोगैस तैयार की जाएगी, इससे 50 फीसद मात्रा में मीथेन गैस उपलब्ध होगी, जिससे जेनसेट को चलाकर विद्युत उत्पन्न की जाएगी। 25 किलो गोबर एवं पानी के मिश्रण से तैयार होने वाली 1000 लीटर बायोगैस से 2 केव्ही बिजली उत्पन्न होती है। इसी तरह 250 किलो गोबर और पानी के मिश्रण से उत्पन्न मीथेन गैस से तैयार होने वाली 10 केव्ही विद्युत से 15 एलईडी बल्ब 8 से 10 घंटे तक जलाए जा सकेंगे।
प्रति यूनिट लागत 2.50 से 3 रूपये
वैज्ञानिक बताते है कि गोबर से उत्पन्न विद्युत की प्रति यूनिट लागत 2.50 से 3 रूपये तक आती है। बायोगैस प्लांट में उपयोग में लाए गए गोबर की शत-प्रतिशत मात्रा जैविक खाद में तब्दील हो जाती है। इस तरह से देखा जाए तो गोबर से पहले विद्युत उत्पादन और उसके बाद शत-प्रतिशत मात्रा में जैविक खाद प्राप्त की जा सकती है। इससे गौठान समितियों और महिला समूहों को दोहरा लाभ मिलेगा।
10 हजार 112 गौठानों के निर्माण की स्वीकृति
यहां यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी गांव योजना के तहत गांवों में पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से 10 हजार 112 गौठानों के निर्माण की स्वीकृति दी जा चुकी है। जिसमें से 6112 गौठान पूर्ण रूप से निर्मित एवं संचालित है। इन गौठानों में पशुओं के चारे-पानी का निःशुल्क प्रबंध किए जाने के साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना के तहत दो रूपए किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। गोबर से महिला स्व-सहायता समूह जैविक खाद सहित अन्य उत्पाद तैयार कर रही हैं। गौठानों में अब तक 51 लाख क्विंटल से अधिक की गोबर खरीदी की जा चुकी है, जिसके एवज में ग्रामीणों, पशुपालकों को 102 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। गोबर से गौठानों में अब तक 12 लाख क्विंटल से अधिक वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट खाद का उत्पादन एवं विक्रय किया जा चुका है।
जहां गोबर की आवक अत्याधिक वहां बॉयोगैस प्लांट और जेनसेट स्थापित होंगे
गांवों के गौठानों में अब गोबर से पहले विद्युत उत्पादन उसके बाद जैविक खाद का उत्पादन होगा। गोबर से रेन्यूएबल एनर्जी का उत्पादन होगा, जिसकी मार्केट वैल्यू 8 से 10 रूपया प्रति यूनिट होगी। जिसका सीधा लाभ उत्पादक समूहों को होगा। गोबर से विद्युत उत्पादन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दो तरह के सिस्टम तैयार किए गए हैं। ऐसे गौठानों में जहां गोबर की आवक अत्याधिक है। वहां बॉयोगैस प्लांट लगाए जाने के साथ ही जेनसेट भी स्थापित किए जाएंगे। गोबर की कम आवक वाले गौठानों में आवश्यकतानुसार अतिरिक्त जेनसेट को परिवहन कर ले जाया जाएगा एवं इसकी मदद से विद्युत उत्पादन किया जाएगा।
jai sir is a dedicated news blogger at The Hind Press, known for his sharp insights and fact-based reporting. With a passion for current affairs and investigative journalism, he covers national, international, sports, science, headlines, political developments, environment, and social issues with clarity and integrity.
