पूरी दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाने वाले महात्मा गांधी के विचारों को छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनाने का प्रयास किया। गांधी जी के रास्ते पर चलकर न केवल हिंदुस्तान बल्कि विश्व के 17 देशों ने आजादी हासिल की। उसके पहले तक जितने भी युद्ध होते थे, उसमें अस्त्र का प्रयोग होता था। गांधी जी ने सत्य और अहिंसा का रास्ता अपनाया। सत्य के माध्यम से उन्होंने लड़ाई लड़ी। कुछ इसी तरह राज्य की कांग्रेस सरकार गांधीवादी सोच के साथ गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

सरकार की प्राथमिकता समाज के सबसे कमजोर तबकों को सशक्त बनाने, गांवों को मजबूत करने और हर व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। राज्य सरकार द्वारा गांव, गरीब, किसानों के साथ महिलाओं और बच्चों के लिए लागू की गई योजनाओं के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। गांधी जी राजनीतिक कार्य को सामाजिक और नैतिक प्रगति के लिए किया जाने वाला कार्य करने की बात कहते थे। उनका मानना था कि लोकतंत्र में जीवन का कोई पक्ष राजनीति से अछुता नहीं है। दरअसल गांधी एक व्यक्ति नहीं विचार है जो मानवतावादी, उदारवादी अहिंसा का सबसे बड़ा पैरोकार है। जिसे गांधी दर्शन विचारों की ताकत से हम दुनिया को बदल सकते थे। हिन्द स्वराज की अपनी अवधारणा के जरिए गांधीजी ने असहयोग कानूनों का सविनय भंग और सत्याग्रह की मदद से स्वराज का रास्ता तय किया।

नवा रायपुर में सेवा ग्राम की तर्ज पर आश्रम

न्याय, सत्य एवं अहिंसा के प्रति अपने सत्याग्रह से उन्होंने विश्व समुदाय को प्रेरित किया। महात्मा गांधी के जीवन का लक्ष्य था पर्दा प्रथा, बाल विवाह, दहेज और सती प्रथा का हमेश के लिए उन्मूलन। भारत की शोषित, पीड़ित, गरीब जनता के साथ बापू की गहरी सहानुभूति थी। कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने उनके पद चिन्हों पर चलते हुए नवा रायपुर में सेवा ग्राम की तर्ज पर आश्रम बनाने का निर्णय लिया है। गांधीवादी विचारधारा को इसके जरिए राज्य में पोषित करने का प्रयास होगा।

150वीं जयंती पर पांच योजनाएं की थी शुरू

छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वी जयंती के मौके पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 2 अक्टूबर को दो साल पहले राज्य में पांच बड़ी योजनाओं की शुरुआत की थी। इन योजनाओं में प्रदेशवासियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य और लोगों की समस्याओं के निवारण को तमाम योजनाएं शामिल है। जिनमें मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान, मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना, मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना, यूनिवर्सल पीडीएस स्कीम और मुख्यमंत्री वार्ड कार्यालय योजना शुरू की गई थी। मुख्यमंत्री कहते हैं कि जन-समुदायों के शासकीय कार्यालयों तक चलकर आने की परम्परा में भी सुधार करते हुए सभी क्षेत्रों में प्रशासन को जनता तक पहुंचने की व्यवस्था बनायी है। केवल शहर बनाने में नहीं बल्कि शहर बसाने में भी विश्वास रखते हैं। छत्तीसगढ़ की राजधानी, नवा रायपुर को कांक्रीट के जंगल से बदलकर एक जीवंत आबाद शहर के रूप में बसाने के लिए सरकार बहुत तेजी से प्रयास कर रही है।

‘छत्तीसगढ़ मॉडल’ की पूरे देश में चर्चा

प्रदेश के बाहर ‘छत्तीसगढ़ मॉडल’ की खूब चर्चा होने लगी है। कांग्रेस सरकार को जनाधार मिलने के साथ ही विरासत में खाली-खजाना मिला था। लोगों को न्याय का इंतजार था, इसलिए तत्कालिक राहत के साथ दूरगामी विकास के कदम भी उठाने थे। स्थिति का मुकाबला गांधी-नेहरू-शास्त्री-पटेल-आजाद-डॉ.अम्बेडकर जैसे मनीषियों की वैचारिक विरासत से करने का प्रयास सरकार ने किया। सादगी, सरलता, जन विश्वास और राज्य के संसाधनों के सम्मान और वेल्यू एडीशन को मूलमंत्र बनाया। किसानों-कर्मवीरों-वन आश्रितों-स्थानीय कलाओं के लिए सरकारी खजाना खोला। कमजोर माली हालत वाले लोगों के लिए राहत का पिटारा खोला। इस तरह गांव से लेकर शहर तक आर्थिक गतिविधियों का थमा हुआ पहिया घूमने लगा। गांवों-घरों में पहुंचे पैसों से बाजारों की रौनक लौटी तो इसकी चमक भी दूसरे प्रदेशों ने देखी।

सुराजी गांव योजना से रोजगार के खुले द्वार

प्रदेश में गोधन न्याय योजना के जरिए 136 करोड़ रुपए का भुगतान सरकारी दर पर गोबर विक्रेताओं को किया गया है। योजना से बड़ी संख्या में भूमिहीनों, महिलाओं तथा कमजोर तबकों को लाभ मिला है। सुराजी ग्राम योजना के तहत नरवा, गरवा, घुरवा, बारी के विकास से गांवों में नवाचार और रोजगार के नए द्वार खुले हैं। इससे न सिर्फ भूमि की उत्पादकता बढ़ रही है बल्कि जल संसाधनों के विकास से फल-सब्जी के उत्पादन से गांवों में कुपोषण से लड़ने के साधन भी जुट रहे हैं। बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन हो रहा है। बल्कि वर्मी कम्पोस्ट और गोबर से विभिन्न कलात्मक वस्तुओं का उत्पादन होने लगा है, जो आगे चलकर जैविक उत्पादों के बड़े बाजार में छत्तीसगढ़ की बड़ी हिस्सेदारी सुनिश्चित करेगा। इन योजनाओं से महिलाएं और युवा साथी बड़ी संख्या में जुड़े हैं। शिक्षा से लेकर संस्कार तक, कौशल से लेकर रोजगार तक, प्रतिभाओं की परख से लेकर विस्तार तक, नए विश्वास का वातावरण बना है।