कुमाराप्पा नेशनल पेपर इंस्टिट्यूट, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय एवं राज्य गौ सेवा आयोग के मध्य एमओयू
किसानों की आय बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा कदम
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में गोबर से विद्युत उत्पादन की परियोजना की भी शुरूआत हो चुकी है। अब गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाया जाएगा। किसानों की आय बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार कई योजनाएं चला रही है. इनमें गोबर की खरीद भी शामिल है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में गोबर से प्राकृतिक पेंट के निर्माण की तकनीकी के हस्तांतरण के लिए कुमाराप्पा नेशनल पेपर इंस्टिट्यूट जयपुर, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग रायपुर के मध्य एमओयू हुआ।
प्राकृतिक पेंट के निर्माण की विस्तृत कार्ययोजना कृषि विभाग द्वारा तैयार की गई है। प्रथम चरण में राज्य के 75 गौठानों का भी चयन प्राकृतिक पेंट के निर्माण की इकाई की स्थापना के लिए किया गया है। चयनित गौठानों में प्राकृतिक पेंट निर्माण सह कार्बोक्सी मिथाईल सेल्यूलोज निर्माण की इकाई की स्थापना की जाएगी। प्राकृतिक पेंट निर्माण की तकनीक कुमाराप्पा नेशनल पेपर इंस्टिट्यूट जयपुर, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है। प्राकृतिक पेंट का मुख्य घटक कार्बोक्सी मिथाईल सेल्यूलोज (सीएमसी) होता है। 100 किलो गोबर से लगभग 10 किलो सूखा सीएमसी बनता है। प्राकृतिक पेंट की मात्रा में 30 प्रतिशत भाग सीएमसी का होता है। 500 लीटर प्राकृतिक पेंट बनाने हेतु लगभग 30 किलो सूखा सीएमसी की जरूरत होती है।


महिला स्व-सहायता समूहों को दी जाएगी ट्रेनिंग
गोबर से पेंट बनाने की तकनीक कुमाराप्पा नेशनल पेपर इंस्टीट्यूट जयपुर ने ईजाद की है। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग पहले ही कुमाराप्पा नेशनल पेपर इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर गाय के गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने का काम कर रहा है. अब छत्तीसगढ़ सरकार भी ऐसे पेंट का निर्माण करेगी. यही वजह है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अधिकारियों की मौजूदगी में कुमाराप्पा नेशनल पेपर इंस्टीट्यूट जयपुर, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग और छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग, रायपुर के बीच आपसी सहमति के लिए एमओयू किया गया। गौठानों में प्राकृतिक पेंट निर्माण के लिए स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, कुशल श्रमिकों एवं युवाओं को कुमाराप्पा नेशनल पेपर इंस्टीट्यूट जयपुर द्वारा प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा। जिससे बाद में ये लोग प्रदेश के गौठानों में ही प्राकृतिक पेंट का निर्माण कर सकें।
खादी इंडिया भी कर चुका है लॉन्च
बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार से पहले कुमाराप्पा नेशनल पेपर इंस्टीट्यूट, जयपुर के साथ मिलकर खादी इंडिया भी गाय के गोबर से बने प्राकृतिक पेंट को लॉन्च कर चुका है. इसी साल जनवरी में यह पेंट लॉन्च किया गया था. इस पेंट को वैदिक पेंट नाम दिया गया था। खादी इंडिया के इस पेंट की बिक्री खादी और ग्रामोद्योग आयोग की मदद से की जा रही है। खादी इंडिया के इस पेंट को बीआईएस यानी कि भारतीय मानक ब्यूरो से भी प्रमाणित किया जा चुका है। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग का कहना है कि गोबर से बना पेंट एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर है और साथ ही यह पर्यावरण के लिए भी अच्छा है। इस पेंट में अपनी इच्छानुसार रंग मिलाकर घर-दुकान की दीवारों पर किया जा सकता है। खास बात ये है कि इस पेंट में हैवी मेटल जैसे सीसा, पारा, क्रोमियम, आर्सेनिक आदि भी नहीं हैं। छत्तीसगढ़ के किसान जहां अभी गोबर को बेचकर पैसे कमा रहे हैं, उम्मीद की जा रही है कि गोबर से पेंट बनाना शुरू होने के बाद उनकी आमदनी में और भी बढ़ोत्तरी होगी।
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