Sansad Raghav Chadda

आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर जारी सियासी उठापटक अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद विवाद और गहराता जा रहा है। इसी क्रम में पार्टी छोड़ चुके बागी सांसदों ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से पहले ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर अपनी बात रखी, जिससे राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है।

राष्ट्रपति से मुलाकात करने पहुंचे सांसदों में राघव चड्डा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल और राजेंद्र गुप्ता शामिल रहे। सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं ने पंजाब की कानून-व्यवस्था, सीमा पार से हो रही अवैध गतिविधियों जैसे नशे और हथियारों की तस्करी, तथा राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की। इसके अलावा, पार्टी से जुड़े हालिया विवादों और आंतरिक मतभेदों को भी राष्ट्रपति के समक्ष रखा गया।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री भगवंत मान भी इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली पहुंच चुके हैं। वह अपने सभी विधायकों के साथ राजधानी आए हैं, हालांकि राष्ट्रपति भवन की ओर से केवल उन्हें ही मुलाकात की अनुमति दी गई है। सीएम मान राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान पंजाब की स्थिति पर अपनी सरकार का पक्ष रखेंगे और बागी सांसदों के कदम को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे। उन्होंने पहले ही इन सांसदों को ‘जनादेश से विश्वासघात’ करने वाला करार दिया है।

मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिए हैं कि वह ‘राइट टू रिकॉल’ जैसे प्रावधान को लागू कराने के लिए केंद्र से हस्तक्षेप की मांग कर सकते हैं, ताकि जनता अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित कर सके। यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने चुटकी लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को सावधान रहना चाहिए, कहीं विधायकों को लेकर जा रही बस का रुख भाजपा कार्यालय की ओर न हो जाए। उनके इस बयान ने सियासी माहौल में और तीखापन जोड़ दिया है।

पंजाब की राजनीति इस समय एक निर्णायक दौर में है, जहां पार्टी के भीतर असंतोष, नेतृत्व पर सवाल और विपक्ष के हमले—तीनों मिलकर एक बड़े राजनीतिक बदलाव की आहट दे रहे हैं।