गरियाबंद के पायलिखण्ड में 25 साल बाद पीने का साफ पानी मिल सका है। कलेक्टर नीलेश कुमार क्षीरसागर के पहल से यंहा दो नए बोर खोदे गए है।|

मैनपुर पायलिखण्ड में पाए जाने वाले हीरे की चमक दुनिया भर में भले मशहूर हो। पर दोहन के अभाव में आज भी यंहा रहने वाले भुंजिया जनजाति के लोगो को मूलभूत सुविधाओ से जूझना पड़ता है। 25 साल पहले जब यंहा की आबादी 200 थी तब केवल 2 बोर खोदे गए थे। 20 साल बाद आबादी 600 से ज्यादा हो गई तब पीने की पानी की समस्या से जूझ रहे जनजाति के लोगो को झेरिया का सहारा लेना पड़ा था।

5 साल से ग्रामीण पेयजल की मांग करते आ रहे थे। मामले की जानकारी जिला प्रशासन को लगी तो बोरवेल की स्वीकृति कर मशीन भेज दिया। लेकिन पायलिखण्ड बस्ती से पहले पड़ने वाले इंद्रावती नदी के चलते एक बार फिर पेय जल के बीच समस्या खड़ी हो गई।

ऐसे में ग्रामीणों की टोली ने गांव में पानी की व्यवस्था के लिए भागीरथ प्रयास किया। 150 मीटर नदी में मिट्टी पेड़ो की डंगाल व पूवाल डाल कर रास्ता बनाया नदी के किनारे का रास्ता भी सकरा था। उसे भी 6 फिट चौड़ी वाहन जाने लायक चौड़ा किया गया। आखिरकार 8 घण्टे के भगीरथ प्रयास के बाद पायलिखण्ड तक बोरवेल पहूचा और सफलता पूर्वक दो बोर का खनन कर वापस भी लौट गया।