ग्रेटर नोएडा के गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी नोटिस का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अक्षत त्रिपाठी मामला सामने आने के बाद शीर्ष अदालत ने संबंधित कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। छात्र को पांच लाख रुपये के निजी मुचलके से जुड़ा नोटिस दिया गया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता बिश्वजीत भट्टाचार्य ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने यह मुद्दा उठाया। उनके अनुसार, नोटिस ऐसे समय जारी हुआ, जब छात्रों से जुड़ी कार्रवाई के संबंध में सुप्रीम कोर्ट पहले निर्देश दे चुका था।
छात्र को नोटिस क्यों जारी किया गया?
चार सितंबर 2026 के नोटिस में पुलिस रिपोर्ट का हवाला दिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, अक्षत पर विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच कथित रूप से सरकार विरोधी और भ्रामक बातें फैलाने का आरोप लगाया गया।
पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि वह छात्रों को कॉकरेच जनता पार्टी के प्रस्तावित धरने में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे थे। रिपोर्ट में ऐसी गतिविधियों से तनाव बढ़ने और शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी।
इसी रिपोर्ट के आधार पर कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने बीएनएसएस की धाराओं 126 और 135 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने का आधार माना।
पांच लाख रुपये के मुचलके का क्या था प्रावधान?
कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने छात्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें पांच लाख रुपये के निजी मुचलके की मांग से संबंधित सवाल किया गया था।
इसके अलावा दो जमानतदारों से भी पांच-पांच लाख रुपये के मुचलके की बात कही गई थी। हालांकि, बाद में यह नोटिस वापस ले लिया गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत में इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी प्रक्रिया से छात्रों में भय की स्थिति बन सकती है।
अक्षत त्रिपाठी मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा?
अक्षत त्रिपाठी मामला सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत के सामने उठाया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों का भी उल्लेख किया।
उनके मुताबिक, अदालत छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर को पहले रद्द कर चुकी है। साथ ही छात्रों के खिलाफ भविष्य में जबरन कार्रवाई को लेकर भी निर्देश दिए गए थे।
नोटिस वापस लिए जाने की जानकारी मिलने पर पीठ ने कार्रवाई के आधार को लेकर सवाल किया। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने भी नोटिस वापस होने के बाद मामले की स्थिति पर सवाल उठाया।
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारी से जवाब मांगने के संकेत दिए
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस जारी किए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने पहले दिए गए न्यायिक निर्देशों के संदर्भ में इस कार्रवाई का आधार जानने की जरूरत बताई।
अदालत की टिप्पणियों से संकेत मिला कि संबंधित अधिकारी से इस मामले में स्पष्टीकरण लिया जा सकता है। हालांकि, अधिकारी की ओर से अंतिम जवाब और अदालत के आगे के आदेश के बाद ही कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
अब मामले में आगे क्या होगा?
अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता से संबंधित नोटिस को याचिका के जरिए रिकॉर्ड पर लाने को कहा है। इसके बाद संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।
अक्षत त्रिपाठी मामला अब इस सवाल के केंद्र में है कि पहले के न्यायिक निर्देशों के संदर्भ में नोटिस जारी करने का आधार क्या था। अदालत इस कार्रवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे निर्णय लेगी।
फिलहाल, नोटिस वापस लिया जा चुका है। इसलिए किसी अधिकारी की मंशा या कानूनी जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
एक नजर में
- छात्र: अक्षत त्रिपाठी
- विश्वविद्यालय: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय
- स्थान: ग्रेटर नोएडा
- नोटिस: पांच लाख रुपये के निजी मुचलके से संबंधित
- जमानतदार: दो
- नोटिस की स्थिति: बाद में वापस लिया गया
- मामला: सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया
कुल मिलाकर, अक्षत त्रिपाठी मामला न्यायिक निर्देशों और प्रशासनिक कार्रवाई के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के सामने आया है। अब संबंधित अधिकारी के स्पष्टीकरण और अदालत की आगे की सुनवाई से स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
मुख्य बातें
- छात्र को पांच लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस मिला।
- दो जमानतदारों से भी पांच-पांच लाख रुपये मांगे गए।
- पुलिस रिपोर्ट के आधार पर नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई।
- बाद में संबंधित नोटिस वापस ले लिया गया।
- सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई के आधार पर सवाल उठाए।
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