अभिनेता आयुष्मान खुराना जालना दौरे को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों से मुलाकात की। इस दौरान एक छात्रा ने उन्हें एक पत्र सौंपा। पत्र में स्कूल तक पहुंचने वाली सड़कों की खराब स्थिति का जिक्र था। छात्रा ने बताया कि असुरक्षित रास्तों से लड़कियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
आयुष्मान खुराना लंबे समय से बच्चों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय हैं। यूनिसेफ इंडिया ने उन्हें 2023 में राष्ट्रीय राजदूत नियुक्त किया था। इससे पहले वह 2020 से सेलिब्रिटी एडवोकेट के रूप में संस्था से जुड़े थे।
जालना दौरे में सामने आई बच्चों की समस्या
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अपनी रोजमर्रा की चुनौतियों के बारे में अभिनेता से बातचीत की। एक छात्रा ने स्कूल जाने के रास्ते की स्थिति को लेकर अपनी चिंता जाहिर की।
उसने पत्र के माध्यम से बताया कि खराब सड़कें बच्चों के लिए मुश्किल पैदा करती हैं। खासकर छात्राओं के लिए सुरक्षित रास्ते उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। इस समस्या को स्थानीय प्रशासन तक पहुंचाने की बात भी सामने आई।
आयुष्मान ने बच्चों की बात को गंभीरता से लिया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और सुरक्षित वातावरण को विकास का अहम हिस्सा बताया।
आयुष्मान खुराना जालना में छात्रा का पत्र पढ़कर भावुक हुए
अभिनेता ने बच्चों की समस्याओं को देखकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि बच्चों की परेशानियों को दूर करना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षा के जरिए अपनी बात रखने वाले बच्चों की सराहना भी की।
छात्रा के पत्र को जिला कलेक्टर तक पहुंचाने की पहल की गई। इससे सड़क से जुड़ी समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है।
ग्रामीण क्षेत्रों की चुनौतियों पर दिया जोर
ग्रामीण भारत में शिक्षा तक पहुंच कई बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी है। स्कूल की दूरी के साथ सुरक्षित रास्ते भी महत्वपूर्ण होते हैं। खराब सड़कें बच्चों की नियमित पढ़ाई को प्रभावित कर सकती हैं।
आयुष्मान ने ग्रामीण बच्चों की समस्याओं को व्यापक नजरिए से देखने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, बच्चों की आवाज को सुनना और उस पर कार्रवाई करना जरूरी है।
यूनिसेफ भी बच्चों की सुरक्षा, समान अवसर और अधिकारों को लेकर लगातार काम करता है। संस्था की जानकारी के अनुसार, आयुष्मान ने ऑनलाइन सुरक्षा, साइबरबुलिंग, लैंगिक समानता और बाल अधिकार जैसे विषयों पर जागरूकता बढ़ाई है।
बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा बनी अहम चिंता
आयुष्मान खुराना जालना यात्रा के दौरान सामने आई समस्या केवल एक गांव तक सीमित मुद्दा नहीं है। सुरक्षित परिवहन और रास्ते बच्चों की शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
खासकर किशोरियों के लिए स्कूल तक सुरक्षित पहुंच जरूरी है। इसलिए स्थानीय स्तर पर सड़क और परिवहन सुविधाओं में सुधार शिक्षा को बढ़ावा दे सकता है।
यूनिसेफ के साथ लंबे समय से जुड़े हैं आयुष्मान
आयुष्मान खुराना ने वर्ष 2020 में यूनिसेफ इंडिया के सेलिब्रिटी एडवोकेट के रूप में काम शुरू किया था। इसके बाद 2023 में उन्हें राष्ट्रीय राजदूत बनाया गया।
वह बच्चों के खिलाफ हिंसा रोकने और उनके अधिकारों को लेकर जागरूकता अभियान का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने साइबरबुलिंग और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर भी बच्चों से बातचीत की है।
सामाजिक मुद्दों पर लगातार सक्रिय हैं अभिनेता
- आयुष्मान बच्चों के अधिकारों से जुड़े अभियानों में भाग लेते हैं।
- उन्होंने ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाई है।
- लैंगिक समानता पर भी अपनी बात रख चुके हैं।
- बाल सुरक्षा और शिक्षा उनके प्रमुख सामाजिक सरोकारों में हैं।
- यूनिसेफ के साथ उनका जुड़ाव कई वर्षों से जारी है।
बच्चों की आवाज को महत्व देने का संदेश
आयुष्मान खुराना जालना दौरे में सामने आई छात्रा की पहल ने बच्चों की भागीदारी का महत्व दिखाया। एक छोटे से पत्र के जरिए स्थानीय समस्या को प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
ऐसी पहल बच्चों को अपनी समस्याएं सामने रखने का अवसर देती है। साथ ही, प्रशासन और समाज की जिम्मेदारी भी सामने आती है। बच्चों के लिए सुरक्षित और बेहतर माहौल तैयार करना सामूहिक प्रयास से ही संभव है।
अभिनेता के आगामी प्रोजेक्ट पर भी नजर
कामकाज की बात करें तो आयुष्मान खुराना फिल्मों में भी लगातार सक्रिय हैं। वह सूरज बड़जात्या की आगामी फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ में नजर आने वाले हैं।
फिल्म में शरवरी, अनुपम खेर, सौम्या टंडन, सीमा पाहवा और स्वानंद किरकिरे भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में बताए गए हैं। फिल्म की रिलीज को लेकर 27 नवंबर की तारीख चर्चा में है।
सामाजिक सरोकारों से जुड़े उनके प्रयासों के साथ फिल्मी करियर भी आगे बढ़ रहा है। जालना की यह यात्रा बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा जैसे जरूरी विषयों को सामने लाती है।
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