बेबी डू डाई डू फिल्म में छाता लिए हुमा कुरैशी का किरदार

सिनेमाघरों में इस फिल्म को कम स्क्रीन मिली थीं. इसलिए बहुत से दर्शक इसे नहीं देख पाए थे. अब यह घर बैठे देखी जा सकती है. हुमा कुरैशी की एक्शन थ्रिलर बेबी डू डाई डू 23 सितंबर 2026 से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है. फिल्म 3 जुलाई को थिएटर में आई थी. समीक्षकों ने इसकी तारीफ की, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह ज़्यादा नहीं चल पाई. अब ओटीटी पर इसे दूसरा मौका मिला है.

फिल्म देखने लायक है या नहीं

हमारी राय में बेबी डू डाई डू एक स्टाइलिश और तेज़ रफ्तार वाली बदले की कहानी है. हुमा कुरैशी बिना एक भी संवाद बोले पूरी फिल्म संभाल लेती हैं. कहानी कहीं-कहीं जानी-पहचानी लगती है और आखिरी मोड़ का अंदाज़ा पहले लग सकता है. फिर भी एक्शन थ्रिलर पसंद करने वालों के लिए यह एक बार देखने लायक है.

फिल्म का पूरा ब्योरा

  • प्लेटफॉर्म: नेटफ्लिक्स, 23 सितंबर 2026 से
  • निर्देशक: नचिकेत सामंत
  • मुख्य कलाकार: हुमा कुरैशी, सिकंदर खेर, चंकी पांडे
  • सहायक कलाकार: सीमा पाहवा, रचित सिंह, विद्या मालवडे, हिमांशु मलिक
  • अवधि: लगभग 2 घंटे 3 मिनट
  • शैली: एक्शन, रिवेंज थ्रिलर
  • खास बात: हुमा कुरैशी और साकिब सलीम ने अपने बैनर सलीम सिब्लिंग्स के तहत इसे प्रोड्यूस किया है
  • हमारी रेटिंग: 5 में से 3 स्टार

कहानी क्या है, बिना बड़े राज़ खोले

फिल्म की नायिका बेबी सुन और बोल नहीं सकती. बचपन में एक पुराने, वीरान होटल में उसके साथ एक दर्दनाक घटना होती है. उसकी बहन की जान चली जाती है.

इसके बाद एक आदमी उसे पालता है, जिसे वह ‘पापा’ कहती है. यह किरदार चंकी पांडे ने निभाया है. पापा उसे एक पेशेवर हत्यारी के रूप में तैयार करता है. मकसद है बहन के कातिल तक पहुंचना.

मुंबई की भीड़ भरी लोकल ट्रेनें, पुरानी इमारतें और तंग गलियां कहानी का हिस्सा बन जाती हैं. बेबी की ज़िंदगी में एक सीधा-सादा पड़ोसी भी है, जो गायक बनना चाहता है. उसके आने से बेबी की दुनिया बदलने लगती है. बाकी कहानी स्क्रीन पर देखना ही बेहतर है.

बेबी डू डाई डू में अभिनय कैसा है

हुमा कुरैशी का अब तक का अलग रूप

हुमा का किरदार इशारों, चेहरे के भाव और होंठ पढ़कर बात करता है. संवाद के बिना इतना गहरा असर छोड़ना आसान नहीं है. गुस्सा, अकेलापन और डर, सब उनकी आंखों में दिखता है. एक्शन सीन में भी वह भरोसेमंद लगती हैं.

बाकी कलाकारों का साथ

चंकी पांडे ‘पापा’ के रूप में चौंकाते हैं. उनका किरदार स्नेह और खतरे, दोनों का मिला-जुला रूप है. सिकंदर खेर खलनायक के तौर पर असरदार हैं. सीमा पाहवा पुलिस अफसर की भूमिका में हल्कापन और गंभीरता, दोनों लाती हैं.

कहां चमकती है और कहां चूकती है फिल्म

मज़बूत पक्ष

  • फिल्म का लुक और रंग-रूप अलग है. मुंबई को नए अंदाज़ में दिखाया गया है.
  • रफ्तार ज़्यादातर तेज़ रहती है. दो घंटे की फिल्म खिंची हुई नहीं लगती.
  • कुछ किरदार अजीब लेकिन याद रहने वाले हैं.
  • संगीत कहानी के मूड के साथ चलता है.

कमज़ोर पक्ष

  • बदले की कहानी का ढांचा नया नहीं है.
  • बीच में कुछ हिस्से उलझे हुए लगते हैं.
  • आखिरी खुलासे का अंदाज़ा सतर्क दर्शक पहले ही लगा सकते हैं.

समीक्षकों ने क्या कहा था

थिएटर रिलीज़ के समय ज़्यादातर समीक्षकों ने फिल्म को 5 में से 3 से 3.5 स्टार दिए थे. लगभग सभी ने हुमा कुरैशी के अभिनय की तारीफ की. कुछ समीक्षकों ने कमज़ोर लेखन और अनुमान लगाने लायक अंत की आलोचना भी की.

रिपोर्ट्स के अनुसार सीमित स्क्रीन मिलने से फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर नुकसान हुआ. कई दर्शक चाहकर भी शो नहीं ढूंढ पाए थे. ओटीटी रिलीज़ से अब यह कमी पूरी हो सकती है.

फिल्म हिंसक दृश्यों वाली है

यह फिल्म हिंसक दृश्यों वाली है. इसमें खून-खराबा और हत्या के सीन हैं. इसलिए यह छोटे बच्चों के लिए सही नहीं है. वयस्क दर्शक और थ्रिलर के शौकीन इसे अकेले या दोस्तों के साथ देख सकते हैं.

अगर आपको ‘कहानी’ या ‘बदलापुर’ जैसी गंभीर बदले की कहानियां पसंद आई थीं, तो यह फिल्म आपको बांधे रख सकती है. हल्का-फुल्का मनोरंजन चाहने वालों को यह भारी लग सकती है.

नेटफ्लिक्स पर देखने से पहले ध्यान दें

फिल्म नेटफ्लिक्स के सभी प्लान पर उपलब्ध है. मोबाइल प्लान वाले दर्शक इसे फोन और टैबलेट पर देख सकते हैं. रात के दृश्य ज़्यादा हैं, इसलिए स्क्रीन की ब्राइटनेस थोड़ी बढ़ाकर देखें. हेडफोन से देखने पर बैकग्राउंड म्यूज़िक का असर बेहतर महसूस होता है. हुमा का किरदार इशारों में बात करता है, इसलिए कुछ दृश्यों में स्क्रीन पर लिखे संदेश पढ़ने पड़ते हैं. जिन्हें सबटाइटल की ज़रूरत हो, वे ऐप की सेटिंग में इसे चालू कर सकते हैं.

हुमा कुरैशी का अभिनय

बेबी डू डाई डू परफेक्ट फिल्म नहीं है. लेकिन यह अलग ढंग से कही गई कहानी है. हुमा कुरैशी का अभिनय इसकी सबसे बड़ी ताकत है. वीकेंड पर एक कसी हुई थ्रिलर देखने का मन हो, तो इसे मौका दिया जा सकता है.

अस्वीकरण: यह समीक्षा लेखक की निजी राय है. फिल्म को लेकर हर दर्शक का अनुभव अलग हो सकता है. रिलीज़ और प्लेटफॉर्म की जानकारी प्रकाशन की तारीख तक के सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है.

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