पृष्ठभूमि
होली पर्व के अवसर पर बैकुंठपुर में इस बार उपभोक्ता व्यवहार में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा जा रहा है। रासायनिक रंगों के स्थान पर प्राकृतिक विकल्पों की मांग में वृद्धि दर्ज की गई है।
स्थानीय पहल
महिला स्वसहायता समूहों ने हरी भाजी और लाल भाजी के रस से हर्बल रंग तैयार कर बाजार में उतारे हैं। यह पहल स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ सुरक्षित उत्सव की दिशा में कदम मानी जा रही है। इन रंगों को त्वचा के अनुकूल और पर्यावरण के लिए कम हानिकारक बताया जा रहा है।
बाजार प्रतिक्रिया
व्यापारियों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार हर्बल गुलाल की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अभिभावकों द्वारा बच्चों के लिए प्राकृतिक रंगों की मांग अधिक देखी गई है। बाजारों में रंगों के साथ पिचकारियों और सजावटी सामग्री की भी अच्छी बिक्री हो रही है।
पर्व की तिथि
2 मार्च को होलिका दहन के बाद 4 मार्च को रंगों का उत्सव आयोजित किया जाएगा। प्रशासन द्वारा नागरिकों से शांतिपूर्ण आयोजन की अपील की गई है।
