Supreme Court

वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने दान राशि के संग्रह में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि श्रद्धालुओं का दिया प्रत्येक पैसा मंदिर की आधिकारिक कोषागार व्यवस्था तक पहुंचना चाहिए।

मुख्य बातें

  • चढ़ावे की राशि दानपेटी में जमा कराने का निर्देश।
  • ऑनलाइन दान सीधे मंदिर की कोषागार में पहुंचाने को कहा।
  • दान राशि के संग्रह में किसी भी अनियमितता पर सख्ती के संकेत।
  • सेवायतों या अन्य लोगों की बाधा को गंभीरता से लेने की बात।
  • मंदिर प्रबंधन को पारदर्शी व्यवस्था लागू करने का निर्देश।

बांके बिहारी मंदिर में दान व्यवस्था पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मंदिर की व्यवस्था से जुड़ी स्थिति रिपोर्ट पेश की गई। यह रिपोर्ट मंदिर के कामकाज की निगरानी कर रही उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने तैयार की है।

वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने अदालत के समक्ष तस्वीरें और वीडियो प्रस्तुत किए। इनमें कुछ लोग पारंपरिक दानपेटी के सामने श्रद्धालुओं से पैसे लेते दिख रहे हैं। आरोप है कि यह राशि पॉलीथिन की थैलियों में रखी जा रही थी।

अदालत के सामने रखी गई इस सामग्री के बाद मामले की गंभीरता पर चर्चा हुई। पीठ ने दान राशि के संग्रह की प्रक्रिया में स्पष्ट व्यवस्था की जरूरत बताई।

सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता पर दिया जोर

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की ओर से दी गई राशि को निर्धारित व्यवस्था से ही जमा किया जाना चाहिए। अदालत ने दानपेटी और ऑनलाइन माध्यम को आधिकारिक संग्रह व्यवस्था के तौर पर इस्तेमाल करने को कहा।

पीठ ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति की ओर से व्यवस्था में रुकावट स्वीकार नहीं की जाएगी। सेवायतों सहित अन्य लोगों की किसी भी बाधा को गंभीरता से लिया जाएगा।

इस निर्देश का उद्देश्य मंदिर की आय और चढ़ावे का स्पष्ट रिकॉर्ड तैयार करना है। इससे दान राशि के संग्रह और उपयोग में जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी।

बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन को लागू करनी होगी पारदर्शी व्यवस्था

अदालत ने मंदिर प्रबंधन समिति को कोषागार से जुड़ी व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य चढ़ावे की पूरी राशि का आधिकारिक हिसाब सुनिश्चित करना है।

साथ ही, श्रद्धालुओं से प्राप्त धनराशि के संग्रह में निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी होगा। ऑनलाइन माध्यम से मिलने वाले दान को भी सीधे मंदिर की आधिकारिक कोषागार व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया गया है।

बांके बिहारी मंदिर मामले में आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। अदालत के निर्देशों के बाद दान संग्रह की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की संभावना है।

अब प्रबंधन को पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े निर्देशों का पालन करना होगा। इसके अलावा, चढ़ावे की राशि के संग्रह पर निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी।

श्रद्धालुओं के चढ़ावे का पूरा हिसाब जरूरी

धार्मिक स्थलों पर मिलने वाला दान श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होता है। इसलिए उसके संग्रह और उपयोग में स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है।

वहीं, किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता से संस्थागत व्यवस्था पर सवाल उठ सकते हैं। इसलिए अदालत के निर्देशों का उद्देश्य दान प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है।

मुख्य अपडेट

  • सुप्रीम कोर्ट ने दान राशि के सीधे कोषागार में पहुंचने पर जोर दिया।
  • दानपेटी और ऑनलाइन माध्यम से संग्रह की व्यवस्था को स्पष्ट किया गया।
  • मंदिर प्रबंधन को पारदर्शी प्रणाली लागू करने का निर्देश मिला।
  • किसी भी तरह की बाधा को गंभीरता से लेने की चेतावनी दी गई।
  • मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।

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