भारत की वजह से मालदीव में हालात तेजी से बदले क्योंकि राष्ट्रपति मुइज्जू की ‘इंडिया आउट’ नीति असफल साबित हुई।

पिछले साल मुइज्जू ने सत्ता में आते ही भारत को लेकर आक्रामक नीति अपनाई और चीन से नजदीकियां बढ़ाईं।

उन्होंने भारत समर्थित रक्षा परियोजनाओं को निशाना बनाया और देश में भारत विरोधी भावना को हवा दी।

परंतु इस नीति का उल्टा असर हुआ और मालदीव का पर्यटन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो गया।

भारतीय पर्यटकों की संख्या घटी, विदेशी मुद्रा संकट बढ़ा और अर्थव्यवस्था को झटका लगा।

भारत की वजह से मालदीव को यह एहसास हुआ कि क्षेत्रीय स्थायित्व और विकास के लिए भारत की साझेदारी जरूरी है।

भारत ने कभी भी प्रतिक्रिया में कठोर रुख नहीं अपनाया, बल्कि संयम से काम लिया और मानवीय सहायता जारी रखी।

भारतीय रक्षा और विकास सहयोग अब भी मालदीव में मौजूद हैं, और भारत की विश्वसनीयता बरकरार रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति बदले सुर अब मुइज्जू सरकार की बदली सोच को दर्शाते हैं।

अब मालदीव सरकार फिर से भारत के साथ मजबूत और संतुलित रिश्ते चाहती है।

भारत की वजह से मालदीव ने आखिरकार समझा कि पड़ोसी देश के साथ अच्छे संबंध ही असली हित में हैं।