रायपुर। डेढ़ दशक तक प्रदेश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी इन दिनों अंतर्कलह से जूझ रही है। कोई पद या पावर नहीं होने से संगठन में आपसी खींचतान बढ़ गई है। नेता एक दूसरे पर सत्ता गंवाने का ठिकरा फोड़ रहे हैं। ऐसे ही बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता अपनी ही पार्टी की कमियां गिनवाने की वजह से चर्चा में हैं। भाजपा के पुराने नेता और आदिवासी समाज में मजबूत पकड़ रखने वाले साय ने बीते दिनों भाजपा को कमजोर बताते हुए पार्टी के सियासी भविष्य के लिए चिंता जाहिर की थी। शनिवार को उन्होंने जशपुर में ये बयान दिया था। अब खबर है कि पार्टी का बड़ा खेमा खुलकर खामियां गिनवाने की वजह से उनसे नाराज है।

दरअसल पिछले दिनों मीडिया से बात करते हुए साय ने कहा था कि पूरे छत्तीगसढ़ को अच्छा नेतृत्व चाहिए। छत्तीसगढ़ में बीजेपी की स्थिति कमजोर हो गई है। किसी तरह से इसे मजबूत करना है, लेकिन इसके लिए नेतृत्व परिवर्तन जरूरी है। इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। जनजातियों की भूमिका बाहर हो गई तो प्रदेश में काफी कमजोरी आएगी। उनको रखना है ओबीसी, सामान्य वर्ग, को भी रखना है। जनजाति वर्ग की संख्या ज्यादा है इसलिए उसकी चर्चा ज्यादा होती है। लेकिन सभी की भूमिका अहम होती है, सभी वर्गों को एक साथ जोड़कर ताकतवर बीजेपी बनाने की जरुरत है। हमारी भूमिका यही रहेगी कि पूरी ताकत से पार्टी एक बार फिर खड़ी हो।

साय ने गलत नहीं कहा- कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी के संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि नंद कुमार साय भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है। राजनीतिक प्रतिबद्धता की वजह से उन्होंने कमजोर शब्द का इस्तेमाल किया है। जबकि भाजपा मृत प्राय हो चुकी है। कई गुटों में बंटी भाजपा, मुद्दों के दिवालिएपन से जूझ रही है। जनता के बीच भाजपा अपना विश्वास अब खो चुकी है। भाजपी की हालत ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ जैसी हो गई है।