केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए कुल ₹19,919 करोड़ की चार बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है ₹7,280 करोड़ की दुर्लभ पृथ्वी स्थायी मैग्नेट (REPM) निर्माण योजना, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

साथ ही कैबिनेट ने पुणे मेट्रो विस्तार के लिए ₹9,858 करोड़, देवभूमि द्वारका (ओखा)-कनालस रेलवे लाइन के दोहरीकरण के लिए ₹1,457 करोड़ और बदलापुर-कर्जत रेलवे की तीसरी व चौथी लाइन के लिए ₹1,324 करोड़ की स्वीकृति दी।

योजना का महत्व और उत्पादन प्रक्रिया

भारत की यह पहली REPM निर्माण योजना है। योजना का उद्देश्य सिंटर किए गए Rare Earth Permanent Magnets का उत्पादन करना है। इसमें दुर्लभ मृदा ऑक्साइड को धातुओं में, धातुओं को मिश्रधातुओं में और अंततः मिश्रधातु से तैयार चुम्बकों में बदलने की प्रक्रिया शामिल है।

  • कुल निवेश: ₹7,280 करोड़
  • उत्पादन क्षमता: 1,000 MTPA सृजन और 1,200 MTPA की इकाइयाँ
  • योजना अवधि: कुल 7 वर्ष (2 वर्ष में इकाइयाँ स्थापित होंगी)

इलेक्ट्रिक वाहन और रक्षा उत्पादन में योगदान

दुर्लभ पृथ्वी तत्व इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण और रक्षा उत्पादन में अहम भूमिका निभाते हैं। इस क्षेत्र में सीमित तकनीकी विशेषज्ञता और फंडिंग के कारण सरकार का समर्थन आवश्यक है।

भारत की रणनीति और वैश्विक परिदृश्य

चीन ने भारत के लिए REPM के निर्यात के शुरुआती लाइसेंस जारी किए हैं, लेकिन भारतीय कंपनियों को अभी तक कोई लाइसेंस नहीं मिला। अप्रैल 2023 के बाद भारत ने दुर्लभ पृथ्वी मैग्नेट सप्लाई चेन विकसित करने में तेजी दिखाई।

वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 2,270 टन दुर्लभ पृथ्वी धातु और यौगिक आयात किए, जिनमें से 65% चीन से आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इन खनिजों को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, और देश में स्थिर व विविध आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए।

इस योजना से भारत की इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा उत्पादन क्षमता मजबूत होगी और विदेशी निर्भरता कम होगी।