हड्डियां मज़बूत रखने के लिए लाखों लोग रोज़ कैल्शियम विटामिन डी सप्लीमेंट लेते हैं. खासकर 50 की उम्र के बाद यह गोली कई घरों की दिनचर्या बन चुकी है. लेकिन मेडिकल जर्नल ‘द BMJ’ में छपे एक बड़े रिव्यू ने इस आदत पर सवाल उठाया है. इसके मुताबिक आम वयस्कों में इन गोलियों से फ्रैक्चर और गिरने का खतरा लगभग नहीं घटता.
क्या कैल्शियम विटामिन डी सप्लीमेंट हड्डी टूटने से बचाते हैं
रिव्यू का जवाब है कि आम वयस्कों में फायदा बहुत कम या न के बराबर है. शोधकर्ताओं ने 69 ट्रायल और 1,53,902 लोगों के आंकड़े जांचे. कैल्शियम अकेले, विटामिन डी अकेले या दोनों साथ, किसी से भी फ्रैक्चर में खास कमी नहीं दिखी. हालांकि ऑस्टियोपोरोसिस की दवा लेने वालों पर यह नतीजा लागू नहीं माना गया.
रिव्यू से जुड़े अहम आंकड़े
- अध्ययन: 69 रैंडमाइज़्ड कंट्रोल्ड ट्रायल का विश्लेषण, कनाडा के शोधकर्ताओं ने किया.
- सिर्फ कैल्शियम: 11 ट्रायल, 9,067 लोग, फ्रैक्चर पर असर बहुत कम.
- सिर्फ विटामिन डी: 36 ट्रायल, 92,045 लोग, असर बहुत कम.
- दोनों साथ: 15 ट्रायल, 51,126 लोग, असर बहुत कम.
- कूल्हे का फ्रैक्चर और गिरना: इनमें भी खास फायदा नहीं दिखा.
यह रिव्यू कब और कहां छपा
यह अध्ययन मई 2026 में द BMJ में छपा था. सितंबर में यह फिर से अंतरराष्ट्रीय विज्ञान खबरों में चर्चा में आया. दरअसल, इसे ‘सिस्टमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस’ कहा जाता है. यानी पहले हुए कई ट्रायल के नतीजे एक साथ जोड़कर देखे गए.
यहां रैंडमाइज़्ड कंट्रोल्ड ट्रायल यानी ऐसा प्रयोग, जिसमें लोगों को संयोग से दो समूहों में बांटा जाता है. एक को दवा मिलती है, दूसरे को नहीं या नकली गोली. इसलिए ऐसे ट्रायल के नतीजे ज़्यादा भरोसेमंद माने जाते हैं.
सबूत कितने पक्के हैं
शोधकर्ताओं ने हर नतीजे के भरोसे का स्तर भी बताया. विटामिन डी अकेले और कैल्शियम-विटामिन डी साथ वाले नतीजों को ‘ज़्यादा भरोसे’ वाला माना गया. वहीं सिर्फ कैल्शियम वाले नतीजे को ‘मध्यम भरोसे’ वाला बताया गया. इसके अलावा जर्नल ने इस अध्ययन के साथ एक संपादकीय भी छापा.
किन लोगों पर यह नतीजा लागू नहीं होता
यह हिस्सा सबसे ज़रूरी है. रिव्यू के मुताबिक नतीजा उन लोगों पर लागू नहीं हो सकता, जिन्हें हड्डियों की कोई खास बीमारी है. साथ ही जो लोग ऑस्टियोपोरोसिस की दवा ले रहे हैं, उन पर भी नहीं.
इसके अलावा मेडिकल न्यूज़ टुडे से बात करने वाले विशेषज्ञों ने कुछ और समूह गिनाए. जैसे जांच में विटामिन डी की कमी वाले लोग, भोजन ठीक से न पचा पाने वाले लोग, किडनी के मरीज़ और बहुत कम कैल्शियम खाने वाले लोग. ऐसे लोगों को डॉक्टर से अपनी स्थिति के हिसाब से सलाह लेनी चाहिए.
इसलिए डॉक्टर की लिखी दवा अपने आप बंद न करें.
तो हड्डियों की मज़बूती के लिए क्या करें
दरअसल, रिव्यू के लेखकों ने गोलियों की जगह दूसरे उपायों पर ज़ोर दिया है. सबसे पहले, संतुलन (बैलेंस) और मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने वाली एक्सरसाइज़. इसके बाद हर व्यक्ति के जोखिम के हिसाब से कई उपायों को साथ अपनाना.
रोज़ की आदतें जो मदद कर सकती हैं
1. हफ्ते में 2-3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, जैसे हल्के वज़न या रेज़िस्टेंस बैंड से कसरत.
2. रोज़ टहलना, ताकि हड्डियों पर हल्का दबाव पड़ता रहे.
3. भोजन से कैल्शियम, जैसे दूध, दही, पनीर, रागी और हरी पत्तेदार सब्ज़ियां.
4. घर में गिरने से बचाव, जैसे बाथरूम में फिसलन रोकने वाली मैट.
5. आंख और कान की नियमित जांच, क्योंकि कमज़ोर नज़र से गिरने का खतरा बढ़ता है.
गोली और भोजन में क्या फर्क है
ड्यूक यूनिवर्सिटी की ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. जोसलिन विटस्टीन ने मेडिकल न्यूज़ टुडे से कहा कि वे कैल्शियम भोजन से लेने की सलाह देती हैं. दरअसल, भोजन में कई पोषक तत्व साथ मिलते हैं. उनके मुताबिक मैग्नीशियम, विटामिन C और विटामिन K2 भी हड्डियों के लिए अहम हैं.
इसलिए कैल्शियम विटामिन डी सप्लीमेंट को ‘शॉर्टकट’ मानना ठीक नहीं है. वहीं दाल, दूध, दही, तिल, रागी और मौसमी सब्ज़ियों वाली थाली लंबे समय तक काम आती है.
बुज़ुर्ग माता-पिता के लिए क्या समझें
अगर घर के बुज़ुर्ग सालों से ये गोलियां ले रहे हैं, तो घबराने की ज़रूरत नहीं है. अगली बार डॉक्टर के पास जाएं, तो यही सवाल पूछें कि उनके लिए कैल्शियम विटामिन डी सप्लीमेंट ज़रूरी है या नहीं. साथ ही उनकी हड्डियों की जांच और गिरने के जोखिम पर भी बात करें.
कैल्शियम विटामिन डी सप्लीमेंट पर आम सवाल
क्या धूप से विटामिन डी लेना बेहतर है?
धूप शरीर में विटामिन डी बनाने में मदद करती है. हालांकि कितनी धूप सही है, यह उम्र, त्वचा और मौसम पर निर्भर करता है. इसलिए कमी की जांच और मात्रा के लिए डॉक्टर की सलाह लें.
क्या युवाओं को भी ये गोलियां लेनी चाहिए?
बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के कोई भी सप्लीमेंट लंबे समय तक न लें. संतुलित भोजन और सक्रिय दिनचर्या पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.
डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें. किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यायाम में बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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