भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने CE20 इंजन का सफल परीक्षण किया है। यह टेस्ट महेंद्रगिरी में 220 kN बढ़े हुए थ्रस्ट पर हुआ। इसे फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट के रूप में किया गया।
इस सफलता से LVM3 की क्षमता बढ़ाने की दिशा में प्रगति हुई है। इसरो भविष्य के मिशनों के लिए अपग्रेडेड C32 स्टेज तैयार कर रहा है। इससे रॉकेट की पेलोड क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
महेंद्रगिरी में 220 kN थ्रस्ट पर सफल टेस्ट
इसरो ने महेंद्रगिरी स्थित परीक्षण केंद्र में यह अहम टेस्ट किया। परीक्षण के दौरान इंजन ने बढ़े हुए थ्रस्ट पर सफल प्रदर्शन किया।
इसके साथ LOX Tank Pressurisation Module यानी LTPM का प्रदर्शन भी सफल रहा। यह मॉड्यूल गगनयान मिशन के C32 स्टेज के लिए विकसित किया गया है।
यह परीक्षण भविष्य के LVM3 मिशनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे अपग्रेडेड स्टेज को परिचालन में लाने की दिशा मजबूत हुई है।
CE20 इंजन क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
CE20 इंजन LVM3 के अपर क्रायोजेनिक स्टेज को पावर देता है। यही स्टेज रॉकेट के अंतिम चरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसरो अब 22 टन थ्रस्ट वाले अपग्रेडेड C32 स्टेज पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य LVM3 की पेलोड क्षमता में बढ़ोतरी करना है।
ज्यादा पेलोड क्षमता से भविष्य के मिशनों को फायदा मिलेगा। इससे LVM3 अधिक भारी उपग्रहों को अंतरिक्ष तक पहुंचा सकेगा।
मार्च में भी हुआ था इंजन का हॉट टेस्ट
इस सफलता से पहले मार्च में भी इंजन का परीक्षण किया गया था। महेंद्रगिरी में समुद्र तल पर यह हॉट टेस्ट हुआ था।
उस परीक्षण में 22 टन थ्रस्ट स्तर पर इंजन को चलाया गया। इसका उद्देश्य इंजन की समुद्र तल पर परीक्षण क्षमता का आकलन करना था।
इसरो के अनुसार, परीक्षण करीब 165 सेकंड तक चला। इस दौरान इंजन और परीक्षण सुविधा ने अपेक्षित प्रदर्शन किया।
हाई-एरिया-रेशियो नोजल बनी बड़ी तकनीकी चुनौती
CE20 इंजन में हाई-एरिया-रेशियो नोजल का इस्तेमाल होता है। इसके कारण समुद्र तल पर परीक्षण करना चुनौतीपूर्ण होता है।
कम एग्जिट प्रेशर के कारण नोजल में फ्लो सेपरेशन हो सकता है। इससे तेज कंपन और थर्मल स्ट्रेस पैदा हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति नोजल की संरचनात्मक मजबूती को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सफल हॉट टेस्ट तकनीकी दृष्टि से अहम उपलब्धि है।
गगनयान मिशन के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि
CE20 इंजन से जुड़े इस परीक्षण में LTPM का प्रदर्शन भी हुआ। यह गगनयान के C32 स्टेज से संबंधित है।
सफल परीक्षण से मिशन के लिए विकसित तकनीकों की क्षमता सामने आई है। इससे भविष्य के परीक्षण और विकास कार्यों को गति मिलेगी।
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