छत्तीसगढ़ में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और औषधीय वनस्पतियों से जुड़े ज्ञान को सहेजने के लिए पहल की गई है। कोण्डागांव में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के छह जिलों के 309 पारंपरिक वैद्यों को स्वैच्छिक प्रमाणन के तहत प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने वैद्यों को प्रमाण पत्र वितरित किए। इस पहल के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण करने और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
छह जिलों के 309 पारंपरिक वैद्यों को मिला प्रमाण पत्र
छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की ओर से आयोजित कार्यक्रम में पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े वैद्यों को प्रमाण पत्र दिए गए। छत्तीसगढ़ में 309 पारंपरिक वैद्यों को मिला प्रमाण पत्र स्थानीय चिकित्सा परंपराओं को पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। बोर्ड ने 31 मार्च 2027 तक प्रदेश के एक हजार पारंपरिक वैद्यों के प्रमाणन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को सुरक्षित रखने पर जोर
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि पारंपरिक वैद्य औषधीय वनस्पतियों की पहचान और उनके पारंपरिक उपयोग का ज्ञान लंबे अनुभवों और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं के आधार पर रखते हैं। इस ज्ञान को व्यवस्थित रूप से दर्ज करना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इससे परिचित हो सकें।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां और वन्य औषधियां छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण विरासत हैं। इनके संरक्षण के लिए संबंधित विभागों को योजनाबद्ध तरीके से काम करने की जरूरत है।
औषधीय पौधों के संरक्षण और रोपण को मिलेगा बढ़ावा
मंत्री ने पंचायतों की उपलब्ध भूमि, घरों की बाड़ियों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर औषधीय पौधे लगाने को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। इससे स्थानीय स्तर पर औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा मिल सकता है। छत्तीसगढ़ में 309 पारंपरिक वैद्यों को मिला प्रमाण पत्र देने की पहल के साथ पारंपरिक ज्ञान को व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
वन उत्पादों और पारंपरिक अनाज से आजीविका के अवसर
केदार कश्यप ने स्थानीय वन उत्पादों, औषधीय पौधों और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की बेहतर ब्रांडिंग, प्रसंस्करण और विपणन पर जोर दिया। उन्होंने साल बीज सहित अन्य वन उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने तथा कोदो, कुटकी और रागी जैसे पारंपरिक अनाजों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। इन प्रयासों से ग्रामीण समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे उपस्थित
कोण्डागांव में आयोजित कार्यक्रम में बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं विधायक लता उसेंडी, छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला सहित जनप्रतिनिधि, पारंपरिक वैद्य और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बोर्ड ने 31 मार्च 2027 तक प्रदेश के एक हजार पारंपरिक वैद्यों के प्रमाणन का लक्ष्य रखा है।
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