हस्तशिल्प जगत में इस वर्ष छत्तीसगढ़ एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित करने जा रहा है। हस्तशिल्प पुरस्कार 2025 के तहत जगदलपुर की ख्यातिप्राप्त शिल्पकार हिराबाई झरेका बघेल को उनकी अद्वितीय धातुकला — विशेषकर बेल मेटल कला में पारंगतता के लिए सम्मानित किया जाएगा। यह प्रतिष्ठित सम्मान 9 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले समारोह में प्रदान किया जाएगा।

कपड़ा मंत्रालय द्वारा आयोजित यह वार्षिक समारोह देश के उन शिल्पियों को सम्मानित करने का उद्देश्य रखता है जिन्होंने अपने कौशल और नवाचार से भारतीय कला को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार की परंपरा 1965 में शुरू हुई थी, जबकि 2002 में प्रारंभ हुए “शिल्प गुरु” पुरस्कार को हस्तशिल्प क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।

यह आयोजन राष्ट्रीय हस्तशिल्प सप्ताह (8–14 दिसंबर) का मुख्य आकर्षण भी बनेगा। इस सप्ताह के दौरान पूरे देश में शिल्प प्रदर्शनियाँ, कौशल-विकास कार्यशालाएँ, चर्चाएँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और शिल्प समुदायों को सशक्त करने वाली गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।

भारत का हस्तशिल्प उद्योग सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण प्रदान करने के साथ अनगिनत शिल्पकारों और उनके परिवारों की आजीविका का आधार भी है। कौशल विकास, टेक्नोलॉजी सहयोग, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्धता जैसे प्रयासों के माध्यम से कपड़ा मंत्रालय इस क्षेत्र को और मजबूत करने की दिशा में सतत कार्य कर रहा है।

हिराबाई झरेका बघेल का यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला परंपरा और ग्रामीण शिल्प कौशल का राष्ट्रीय प्रतीक भी है। यह पुरस्कार आने वाली पीढ़ियों के शिल्पकारों को प्रेरणा और प्रोत्साहन प्रदान करेगा।