छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड, ओपी चौधरी, अनुराग सिंह देव,

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल अब आवास निर्माण के साथ प्रदेश की दूसरी बड़ी विकास परियोजनाओं में भी भागीदारी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने नवा रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला में यह बात कही।

मंत्री के अनुसार, मंडल की भूमिका अब सड़क, पुल, खेल परिसर, सार्वजनिक भवन, टाउन प्लानिंग और शहरी पुनर्विकास जैसे क्षेत्रों में भी बढ़ाई जाएगी। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से आधुनिक तकनीक अपनाने, वित्तीय प्रबंधन बेहतर करने और काम समय पर पूरा करने पर जोर दिया।

करीब 700 करोड़ रुपये की ऋण देनदारी समाप्त

मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि पहले मंडल को बड़ी ऋण देनदारी और लंबे समय से खाली पड़ी संपत्तियों जैसी वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। राज्य सरकार ने वित्त विभाग के सहयोग से करीब 700 करोड़ रुपये की ऋण देनदारी समाप्त करने का निर्णय लिया। इससे मंडल को आर्थिक दबाव कम करने और नई परियोजनाओं पर ध्यान देने का अवसर मिला।

रिक्त संपत्तियों की बिक्री को गति देने के लिए वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना भी लागू की गई। इसके तहत छूट और विपणन प्रयासों के जरिए संपत्तियों के विक्रय को बढ़ावा दिया गया। सरकार का उद्देश्य मंडल को अधिक आत्मनिर्भर बनाना और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है।

मांग और बुकिंग के आधार पर शुरू होंगी नई आवासीय परियोजनाएं

मंत्री ने कहा कि भविष्य में आवासीय परियोजनाएं शुरू करने से पहले उनकी वास्तविक मांग का आकलन किया जाएगा। पहले कई बार पर्याप्त मांग के बिना परियोजनाएं शुरू होने से आवास खाली रह जाते थे और पूंजी लंबे समय तक फंसी रहती थी।

नई व्यवस्था में शुरुआती तीन महीनों में 30 प्रतिशत बुकिंग या कुल 60 प्रतिशत बुकिंग से जुड़ी शर्तों को निविदा प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इससे मांग के अनुसार परियोजनाएं शुरू करने और वित्तीय जोखिम कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही आवासों की गुणवत्ता, उचित स्थान, लागत और नागरिक सुविधाओं पर ध्यान देने की बात कही गई।

सड़क, पुल और खेल अधोसंरचना में भी बढ़ेगी भागीदारी

ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मंडल के पास अनुभवी अभियंताओं और तकनीकी कर्मचारियों का संसाधन उपलब्ध है। इस विशेषज्ञता का उपयोग आवास निर्माण तक सीमित न रखकर सड़क, पुल-पुलिया, स्टेडियम, खेल परिसर और सार्वजनिक भवनों के निर्माण में भी किया जाना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को दूसरे राज्यों की निविदाओं में भाग लेने और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके अनुसार, आने वाले दो वर्षों में मंडल को छत्तीसगढ़ के बाहर भी परियोजनाएं हासिल करने का लक्ष्य लेकर काम करना चाहिए। इससे आय बढ़ाने के साथ तकनीकी अनुभव को भी विस्तार मिल सकता है।

टीपीएस और पीपीपी मॉडल से विकास को मिलेगी गति

मंत्री ने कहा कि अधोसंरचना विकास के लिए केवल सरकारी बजट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), टाउन प्लानिंग स्कीम (टीपीएस), पुनर्विकास और अन्य वैकल्पिक वित्तीय मॉडल अपनाने की जरूरत है।

टीपीएस के जरिए निजी भूमि का योजनाबद्ध विकास कर सड़क, जलापूर्ति और अन्य जरूरी सार्वजनिक सुविधाएं तैयार की जा सकती हैं। वहीं, पीपीपी मॉडल में निजी क्षेत्र की भागीदारी से परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और सरकारी वित्तीय दबाव कम करने के अवसर मिलते हैं।

सेरीखेड़ी परियोजना में करीब 94 एकड़ भूमि बचाने का उदाहरण

मंत्री ने सेरीखेड़ी क्षेत्र की टाउन प्लानिंग परियोजना का उल्लेख करते हुए बताया कि करीब 800 करोड़ रुपये की अधोसंरचना लागत वाली इस परियोजना में पीपीपी मॉडल अपनाने की पहल की गई है।

उनके अनुसार, शुरुआती गणना में विकास लागत के समायोजन के लिए लगभग 218 एकड़ भूमि की आवश्यकता सामने आई थी। प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के बाद यह आवश्यकता घटकर करीब 124 एकड़ रह गई। इस तरह लगभग 94 एकड़ भूमि बचाने की संभावना बनी, जिसका उपयोग अन्य सार्वजनिक जरूरतों के लिए किया जा सकता है।

सरकारी भूमि के पुनर्विकास से विकसित होंगी सुविधाएं

ओ.पी. चौधरी ने कहा कि प्रदेश के शहरों में कई स्थानों पर उपलब्ध सरकारी भूमि का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। पुनर्विकास मॉडल के जरिए ऐसी भूमि पर आधुनिक सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करने की संभावनाएं हैं।

उन्होंने कलेक्ट्रेट भवन, सरकारी कार्यालय, पुस्तकालय, उद्यान, स्टेडियम और इंडोर खेल परिसरों जैसी सुविधाओं का उदाहरण दिया। मंत्री के मुताबिक, व्यावसायिक उपयोग से संसाधन जुटाकर जनहित से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है, जिससे सरकारी बजट पर अतिरिक्त बोझ कम रखने में मदद मिलेगी।

खेल परिसरों के संचालन और रखरखाव पर भी जोर

मंत्री ने कहा कि खेल अधोसंरचना बनाना ही पर्याप्त नहीं है। उसके नियमित रखरखाव, बेहतर संचालन और अधिकतम उपयोग की व्यवस्था भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि अच्छी खेल सुविधाओं के संचालन से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन की संभावनाएं बढ़ती हैं। ऐसे आयोजनों से पर्यटन, होटल, परिवहन और व्यापार जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

नवा रायपुर में बैडमिंटन, तैराकी, स्क्वैश और क्रिकेट जैसी खेल विधाओं के लिए प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित करने की पहल का भी उल्लेख किया गया।

प्रशिक्षण में एआई, वित्तीय प्रबंधन और आधुनिक तकनीक पर चर्चा

कार्यशाला में अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशासनिक दक्षता, वित्तीय जोखिम प्रबंधन, संपदा प्रबंधन और निर्माण गुणवत्ता जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑनलाइन आवास प्रबंधन, टाउन डेवलपमेंट, विपणन रणनीतियों और आधुनिक परियोजना प्रबंधन से जुड़े सत्र भी शामिल रहे।

आईआईएम रायपुर, आईआईआईटी नवा रायपुर और एनआईटी रायपुर सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में मार्गदर्शन दिया। इसका उद्देश्य कर्मचारियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाना और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना था।

विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के लक्ष्य में होगी अहम भूमिका

मंत्री ओ.पी. चौधरी ने अधिकारियों और कर्मचारियों से नवाचार, टीमवर्क और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की संख्या बढ़ाने के साथ उनकी गुणवत्ता, आर्थिक व्यवहार्यता, समयबद्ध क्रियान्वयन और जनोपयोगिता पर भी ध्यान देना जरूरी है।

मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि संस्था का विस्तार केवल नाम या अधिनियम में बदलाव नहीं, बल्कि सोच और कार्यशैली में परिवर्तन का अवसर है। उन्होंने संपत्ति विक्रय, राजस्व अर्जन, नई परियोजनाओं और आधुनिक टाउनशिप के विकास पर जोर दिया। कार्यशाला में वरिष्ठ अधिकारियों, अभियंताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने भी भाग लिया।

छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की बदली हुई भूमिका के तहत आवास निर्माण के साथ शहरी नियोजन और सार्वजनिक अधोसंरचना पर ध्यान देने की योजना है। कार्यशाला में प्रस्तुत रोडमैप का उद्देश्य संस्था की वित्तीय क्षमता और तकनीकी दक्षता बढ़ाकर प्रदेश की विकास परियोजनाओं में उसकी भागीदारी का विस्तार करना है।







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