छत्तीसगढ़ में युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक बनाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उद्योगों की जरूरतों के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षित करने पर जोर दिया है। इस पहल से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने का लक्ष्य है।
छत्तीसगढ़ आईटीआई योजना से युवाओं को मिलेगा लाभ
राज्य में पीएम-सेतु योजना के तहत 30 शासकीय आईटीआई का उन्नयन प्रस्तावित है। इन संस्थानों में आधुनिक मशीनें, तकनीकी उपकरण और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे विद्यार्थियों को बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप कौशल सीखने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री की उपस्थिति में दुर्ग और बस्तर क्लस्टर के लिए दो महत्वपूर्ण समझौते हुए। दुर्ग क्लस्टर में भिलाई स्टील प्लांट और बस्तर क्लस्टर में एनएमडीसी लिमिटेड उद्योग भागीदार होंगे। इस सहयोग से प्रशिक्षण और उद्योगों के बीच तालमेल बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पीएम-सेतु योजना के तहत छह क्लस्टरों का विकास
प्रदेश में दुर्ग, कोरबा, सरगुजा, बस्तर, रायगढ़ और रायपुर को योजना के लिए चुना गया है। इन छह क्लस्टरों में छह हब आईटीआई और 24 स्पोक आईटीआई शामिल होंगे। इस तरह कुल 30 शासकीय संस्थानों को आधुनिक बनाने की योजना है।
सरकार ने पांच वर्षों में लगभग 1,446 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है। प्रत्येक क्लस्टर के लिए करीब 241 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। हब आईटीआई के लिए 81 करोड़ रुपये और प्रत्येक स्पोक आईटीआई के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
उद्योगों की जरूरतों के अनुसार मिलेगा प्रशिक्षण
छत्तीसगढ़ आईटीआई के आधुनिकीकरण से तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की आवश्यकताओं से जोड़ने पर ध्यान दिया जाएगा। प्रशिक्षण में आधुनिक उपकरणों और प्रयोगशालाओं की अहम भूमिका होगी। इससे युवाओं को व्यावहारिक ज्ञान हासिल करने में मदद मिल सकती है।
योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार की 50 प्रतिशत, राज्य सरकार की 33 प्रतिशत और उद्योग भागीदारों की 17 प्रतिशत वित्तीय हिस्सेदारी निर्धारित है। इस व्यवस्था से संस्थानों के विकास में सरकार और उद्योगों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों पर रहेगा जोर
राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से प्रशिक्षित कर्मचारियों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के लिए तैयार करना महत्वपूर्ण है। आधुनिक प्रशिक्षण से उनकी तकनीकी दक्षता और रोजगार क्षमता बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा।
इसके साथ ही आईटीआई को नवाचार और उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे युवाओं को नौकरी के साथ स्वरोजगार के विकल्पों के लिए भी तैयार किया जा सकेगा।
योजना की प्रमुख बातें
- 30 सरकारी आईटीआई: छह हब और 24 स्पोक संस्थानों का उन्नयन प्रस्तावित है।
- 1,446 करोड़ रुपये का निवेश: छह क्लस्टरों में पांच वर्षों के दौरान निवेश की योजना है।
युवाओं को मिलेंगी ये सुविधाएं
- आधुनिक मशीनों और उपकरणों के साथ प्रशिक्षण।
- उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी कौशल।
- रोजगार के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण के बेहतर अवसर।
- स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए कौशल विकसित करने में सहयोग।
इस योजना के माध्यम से राज्य में तकनीकी प्रशिक्षण व्यवस्था को उद्योगों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे युवाओं को भविष्य की रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में मदद मिल सकती है।
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