छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ पावर कंपनी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। साय मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड के लिए 200 करोड़ रुपये तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) और बॉन्ड जारी कर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस फैसले के बाद कांग्रेस ने सरकार पर सरकारी बिजली कंपनियों के निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ाने का आरोप लगाया है। हालांकि सरकार की ओर से इस निर्णय का उद्देश्य निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना बताया गया है।
मुख्य बातें
- 200 करोड़ रुपये तक के एनसीडी और बॉन्ड जारी करने को मंजूरी।
- स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव स्वीकृत।
- कांग्रेस ने निजीकरण की आशंका जताई।
- सरकार ने निवेश और वित्तीय संसाधन बढ़ाने की बात कही।
- फैसले को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बहस तेज।
छत्तीसगढ़ पावर कंपनी को लेकर कांग्रेस का आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ पावर कंपनी को बाजार में सूचीबद्ध करने का फैसला भविष्य में सरकारी हिस्सेदारी कम करने की दिशा में कदम हो सकता है। उनका आरोप है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को निजी निवेशकों के लिए खोलने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि राज्य की बिजली कंपनियां पहले से आत्मनिर्भर हैं। ऐसे में शेयर बाजार से पूंजी जुटाने की आवश्यकता नहीं है।
सरकार के फैसले में क्या है प्रस्ताव?
साय मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड के लिए 200 करोड़ रुपये तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर और बॉन्ड जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
सरकार का कहना है कि इससे आम नागरिकों और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी। साथ ही कंपनी के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने में भी मदद मिलेगी। प्रस्ताव में स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
कांग्रेस ने किन मुद्दों को बनाया आधार?
कांग्रेस ने सरकार पर बिजली क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि बिजली दरों में बढ़ोतरी, स्मार्ट मीटर और बिजली बिल राहत योजना से जुड़े फैसलों के बाद अब सार्वजनिक कंपनियों को बाजार में उतारने की तैयारी की जा रही है।
इसके अलावा कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार आर्थिक प्रबंधन में विफल रही है, इसलिए सार्वजनिक कंपनियों के जरिए पूंजी जुटाने की कोशिश की जा रही है।
एक नजर में
- कंपनी – छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड
- प्रस्ताव – 200 करोड़ रुपये तक एनसीडी और बॉन्ड जारी करना
- उद्देश्य – निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना
- कांग्रेस का आरोप – निजीकरण की तैयारी
- स्थिति – राजनीतिक विवाद जारी
आगे क्या हो सकता है?
छत्तीसगढ़ पावर कंपनी से जुड़ा प्रस्ताव अब नियामकीय प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगा। इस बीच कांग्रेस लगातार सरकार के फैसले का विरोध कर रही है। दूसरी ओर सरकार इस निर्णय को वित्तीय प्रबंधन और निवेश बढ़ाने की रणनीति बता रही है।
आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।
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