सामाजिक सुरक्षा योजनाएं

भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य में राज्यों की सामाजिक भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। इसी सोच के साथ सामाजिक सुरक्षा योजनाएं छत्तीसगढ़ में जरूरतमंद वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार ने सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को प्राथमिकता देते हुए कई प्रभावी कदम उठाए हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं तथा अन्य जरूरतमंद वर्गों के लिए अनेक योजनाओं का विस्तार किया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य आर्थिक सहायता के साथ सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन सुनिश्चित करना है।

सामाजिक सुरक्षा योजनाएं बनीं आर्थिक संबल

राज्य सरकार की पेंशन योजनाओं का लाभ अब लाखों नागरिकों तक पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या लगातार बढ़ी है। वृद्धावस्था, दिव्यांग, विधवा और अन्य योजनाओं के माध्यम से 21.73 लाख से अधिक लोगों को नियमित सहायता मिल रही है।

डीबीटी प्रणाली के जरिए अधिकांश हितग्राहियों के खातों में सीधे राशि भेजी जा रही है। आधार सीडिंग और ई-केवाईसी से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी है। इससे पात्र हितग्राहियों तक समय पर सहायता पहुंच रही है।

दिव्यांग सशक्तिकरण को मिली नई गति

राज्य में यूडीआईडी कार्ड धारकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण योजना का दायरा भी तेजी से बढ़ा है। इसके अलावा कौशल विकास और पुनर्वास कार्यक्रमों ने दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।

H3: सामाजिक सुरक्षा योजनाएं से शिक्षा और पुनर्वास को मजबूती

दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तार किया गया है। विशेष विद्यालयों और पुनर्वास केंद्रों को भी सुदृढ़ बनाया गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास को एकीकृत रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए संवेदनशील पहल

राज्य सरकार ने वृद्धाश्रमों और देखरेख संस्थाओं की क्षमता बढ़ाई है। सियान हेल्पलाइन के माध्यम से बुजुर्गों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। हेल्पलाइन पर बढ़ती कॉल संख्या लोगों के विश्वास को दर्शाती है।

नशामुक्ति और पुनर्वास पर विशेष जोर

भारत माता वाहिनी योजना के अंतर्गत नशामुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई है। इन केंद्रों में उपचार, परामर्श और पुनर्वास की समग्र सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे प्रभावित व्यक्तियों को सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत मिल रही है।

सुगम्य छत्तीसगढ़ अभियान का विस्तार

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के अनुरूप सार्वजनिक भवनों और सरकारी संस्थानों को दिव्यांग-अनुकूल बनाया जा रहा है। साथ ही सेवाओं को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

डिजिटल प्रशासन से बढ़ी पारदर्शिता

डीबीटी, ई-केवाईसी, आधार सीडिंग और डिजिटल डेटा प्रबंधन ने योजनाओं की निगरानी को मजबूत बनाया है। तकनीक और मानवीय दृष्टिकोण के संतुलन ने सामाजिक सुरक्षा योजनाएं को अधिक प्रभावी बनाया है। इससे सेवा वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ी है।

प्रमुख उपलब्धियां

  • 21.73 लाख से अधिक नागरिकों को नियमित पेंशन सहायता।
  • यूडीआईडी धारकों और सहायक उपकरण लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि।
  • सियान हेल्पलाइन से वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर सहायता।
  • नशामुक्ति केंद्रों और पुनर्वास सेवाओं का विस्तार।
  • डिजिटल भुगतान और ई-केवाईसी से पारदर्शी प्रशासन।

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