छत्तीसगढ़ में वर्तमान समय में तापमान वृद्धि का एक स्पष्ट और संगठित रुझान परिलक्षित हो रहा है, जो क्षेत्रीय मौसमीय परिस्थितियों एवं वायुमंडलीय तंत्र की सक्रियता से प्रभावित है। राज्य के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे अधिक दर्ज किया जा रहा है, जबकि राजनांदगांव जैसे क्षेत्रों में यह 43 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है।

भौगोलिक दृष्टि से विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि राज्य के उत्तरी एवं दक्षिणी सीमावर्ती क्षेत्र, विशेषकर अंबिकापुर और बस्तर, अपेक्षाकृत कम प्रभावित हैं। इसके विपरीत मध्य एवं पश्चिमी भागों में तापमान वृद्धि अधिक तीव्र गति से दर्ज की जा रही है। राजधानी रायपुर, माना तथा बिलासपुर में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास स्थिर रहा, जो शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव (Urban Heat Island Effect) का संकेत भी देता है।

वर्तमान मौसमीय परिदृश्य में उत्तर-पश्चिमी हवाओं की सक्रियता एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में उभरकर सामने आई है। ये हवाएं शुष्क एवं उच्च तापमान वाली होती हैं, जो सतही तापमान को तेजी से बढ़ाने में सहायक होती हैं। इसके अतिरिक्त, प्रदेश में प्रति चक्रवातीय परिसंचरण की उपस्थिति भी तापमान वृद्धि को प्रोत्साहित कर रही है।

पिछले 24 घंटों के दौरान तापमान में क्रमिक वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें लालपुर जैसे क्षेत्रों में आधा डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि देखी गई। हालांकि यह वृद्धि सीमित प्रतीत होती है, किंतु समग्र परिदृश्य में यह निरंतर बढ़ते तापमान के संकेत देती है। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में यह प्रभाव अधिक स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ है।

आगामी तीन से चार दिनों के पूर्वानुमान के अनुसार, अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की अतिरिक्त वृद्धि संभावित है। इस आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि रायपुर सहित अन्य प्रमुख शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यह स्थिति न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से बल्कि जनस्वास्थ्य के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।

इस परिप्रेक्ष्य में आवश्यक है कि नागरिक स्तर पर सावधानी बरती जाए तथा प्रशासनिक तंत्र द्वारा निरंतर निगरानी एवं आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, जिससे संभावित प्रभावों को न्यूनतम किया जा सके।